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  • 1 day ago

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00:00मुझे नीन बहुत आती है और जब मैं सोता हों तो ओवर स्लिप कर जाता हूं
00:04दिन भर कुछ करा नहीं और जाके बिस्तर तोड़ दिया तो ये अयाशी है
00:09क्या चाहते हो अयाशी या इनाम
00:11खिलना कुछ शुरू करो जिम जाना शुरू करो
00:14नींद इनाम की तरह होनी चाहिए
00:17मज़ा है काम में
00:19अब जब काम में ही मज़ा है तो क्रोध किस बार प्याएगा
00:21सवाल ये होना चाहिए कि जब जग रहें तब क्या करें
00:24एक एक मिनिट से पाँच-पाँच मिनिट की कीमत निकालो
00:27तुम स्वहम को जानते नहीं तुमने मान लिया कि तुम आधे अधूर हो
00:31बस अंधी दिशाओं में बढ़े जा रहे हो दौर रहे हो ठोकरे खा रहे हो गिर रहे हो
00:35तुमें सच मुझ क्या चाहिए
00:36पहले जानो तो सही कि दुनिया में पाने लायक है क्या
00:40सुलजने से पहले उलज़ना जरूरी होता है
00:43प्रणाम आचार जी
00:50मेरा नाम हर्श कुमार है मैं सेकेंड यर का स्टूडेंट हूँ
00:55और मेरा एक बहुत ही जैन्वन प्रॉब्लम यह है कि मुझे नीन बहुत आती है
01:01और जब मैं सोता हूँ तो ओवर स्लीप कर जाता हूँ
01:05तो इसके ओपर मैं कैसे कंट्रोल करूँ
01:07एलो सर्थ
01:12नहीं मैं सोच रहा था तुम खुश नसीब कितने हो मुझे आती नहीं है
01:23भाई करने है कोई काम नहीं है क्या नीन कैसे आ जाती है
01:30शर काम होते है बहुत सारे सको करना भी ओड़ता है करने जब बैठते है ना तो सर बंतलब बहुत नीन आने लगती है और जवरम है ज़ारिस्ति करना चाहते है
01:42काम जरूरी होगत तो न 느ंद कैसे आ जाएगी
01:47कुछ खिलते हो
01:49अशना 27
01:51मेंन कुछ भी नी खिलते
01:54ύ degrees
02:00क्या करते हो
02:03सर
02:07classes attend करते हैं
02:10और
02:10कुछ clubs हो गए रहा होते हैं
02:13उसमें कुछ कुछ करते रहते हैं
02:14कुछ क्या होता है
02:15सर
02:19club's
02:19club's में काम होता है न सर
02:21अरे क्या होता है
02:22सर
02:25events organize करवाना
02:27कौन से event
02:28सर जैसे रिसेंटली कॉलेज में एक एवेंट हुआ था मतलब क्लब में जिसमें हम लोग प्लास्टिक कलेक्ट किये थे रिसाइक्लिंग परपस के लिए ताकि केंपस को थोड़ा क्लीन किया सके जाए अगय थे
02:42तो प्रृफेसरक कहा अप आप सो गयंठे गया ना सॉए क्योंकि गराए गई अंपर इकटे कोडर एंपरी वहां के मनेंगानों
02:59कि मेंसे नहीं इंपर आप कि आए आप stock करने गये थे कहीं पे कुड़े गेर हैं स्वागान कर घ्र और के लिए जा कि Design
03:09सर वो तो उसमें काम कर रहे थे हैं
03:15वही बात है
03:16काम कर रहे हो तो नहीं आती नीद
03:18कुछ है नहीं सार्थक उद्देश जीवन में इसलिए इतनी नीद आती है
03:22पहली बात तो
03:27खेलना कुछ शुरू करो
03:31यही उम्र होती है जब खेलना सीख सकते हो कुछ
03:37खेलना शुरू करो
03:39जिम जाना शुरू करो
03:41ताकि
03:41बदन मस्बूत हो और
03:45खेलना वगेरा भी ये जो
03:49आपके स्लीप पैटर्न्स वगेरा होते हैं
03:52इनको बहुत नियमित कर देता है
03:53कभी ऐसा हुआ है कि कोई खेल रहा है क्रिकेट और
03:58आप बैटिंग पर हो और उदर बॉलर दोड़ता हूँ आ रहा है और आप सो गए
04:02जब तक बॉल आई तब तक लेटे हुए थे
04:05यहां कि बैटिंग कर रहा था पीछे से डिस्टरबेंस आया तो मुण के देखा
04:14क्या हुआ देखा विकेट की पर खर्राटे मार रहा है
04:16ऐसा तो नहीं होता ना जब करने को कुछ नहीं होता तो मन कहता है
04:28कि सो ही जाते हैं अब सुनो ग्यान की बात बिलकुल नींद इनाम की तरह होनी चाहिए
04:41दिन में जम करके सार्थक मेहनत करी है इसका पुरसकार होना चाहिए नींद
04:54दिन भर कुछ करा नहीं और जाके बिस्तर तोड़ दिया तो ये अयाशी है
04:59कुछ भी नहीं कर रहे थे
05:02क्या कर रहे थे
05:05इधर उधर समय कर आया
05:07और फिर जब कुछ करने को नहीं था
05:09तो बिस्तर पर पड़ गए
05:10ये आयाशी है
05:11क्या चाहते हो
05:13आयाशी
05:14या इनाम
05:17जब इनाम मिलता है
05:20तो उसमें गरिमा है
05:21और न्याय है
05:24निया है न कुछ ऐसा करा जिसके लिए हमको सम्मानित किया गया है नींद एक सम्मान की तरह मिली है दिन ऐसा जिया की नींद अब आपको एक सम्मान पत्र की तरह मिल रही है आपकी प्रशस्ति में पलंग बिचाया गया है कितना सुंदर लग रहा है
05:45कि जैसे कोई युद्धा जंग से लौट रहा हो और उसका स्वागत किया जा रहा हो दिखा के आई यह हमें पता है कि बहुत-बहुत समय से आप लेटे भी नहीं है आप लेट जाए यह आप सुईए
05:57ऐसी होनी चाहिए नीद
05:58और दूसरी नीद ऐसी होती है कि जैसे बिस्तर पर खटमल भी हमेशा मौजूद होता है
06:04वो भी तो बिस्तर पर होता है हर समय बेट बग्स
06:09तो बेट बग्स वाली नीद चाहिए क्या वो भी तो बिस्तर पर होता है
06:16नीद ऐसी चीज होनी चाहिए जो मेहनत के बाद खुद बखुद आए
06:27और अगर नीद नहीं आ रहे तो इसका मतलब सीधा है
06:31आज दिन में मकारी करिए
06:33जब मेहनत ही नहीं करी तो नीद कहां से आए
06:36जैसे ये नियम होता है न कि
06:40मेहनत करते हो तो रात को रोटी मिलती है
06:44मेहनत की ही तो रोटी खाते हो न
06:48मेहनत करी है तो रोटी मिली है
06:49वैसे ही नियम होना चाहिए कि मेहनत करी है तो नीद मिली है
06:54और जैसे ये तै होता है कि अगर मेहनत नहीं करोगे तो रोटी नहीं मिलेगी
06:58उसी तरह अपने लिए तया कर लो कि महनत नहीं करेंगे
07:01तो सोईगे भी नहीं
07:03नीद आनी यह नहीं चाहिए क्यों आ रही है
07:04इसका मतलब काम पूरा नहीं किया है
07:08तो और जम के काम करो
07:09और काम मने यही नहीं कि
07:12पढ़ाई वाला काम
07:14उसमें खेलने काम भी आता है,
07:15जितने भी काम सही, सार्थक,
07:17सच्चे हैं, उस सारे काम आते हैं,
07:19उस सारे काम करो ना,
07:22फिर आएगी नीन,
07:24और फिर नहीं भी आते हैं नीन
07:25तो कोई बात नहीं,
07:27कब तक बचेगी?
07:30क्योंकि
07:31मातर मानसिक नहीं होती हैं,
07:40अपने आप सुला देंगे
07:41मेहनत से जब ठक जाओगे
07:44तो तुम चाहो न चाहो
07:46शरीर तुम्हे अपने आप सुला देगा फिर
07:48ये हुई असली नीद
07:50इमानदार आदमी की
08:01पहचान ये कि उसको
08:02नीद आती है वो कहता है
08:04नहीं चाहिए क्योंकि काम
08:06से प्यार है भी और करना है
08:08इमानदार आदमी की क्या
08:12पहचान उसे नीद खुद बखुद आती है
08:15बुलावा देने आती है
08:16कहती है सो जाओ ठक गए हो
08:18और कहता है नहीं चाहिए
08:20अभी आदा गंटा और काम करूँगा
08:22और बेमानी भरा जीवन कैसा होता है
08:26कीतना ज्यादा सो लिए कि नीद समस्या बन जाती है
08:33क्या समस्या है
08:37बहुत सोते है
08:40यह बस यह बताता है
08:43कि मामला या समस्या नीद से संबंधित है ही नहीं
08:50समस्या नीद की नहीं समस्या जागरत की है
08:54जगा हुआ जीवन नहीं जी रहे हो
08:57जो जगा हुआ जीवन जीएगा
09:00नींद उसके लिए समस्य आप नहीं रह जानी
09:02और
09:08क्लब्स पकड़ो
09:09स्पोर्ट्स पकड़ो, जिम पकड़ो
09:12और जो भी तुम्हारी पढ़ाई है
09:14उसमें पढ़ाई में और ज्यादा महनत करो
09:16इसके लावा कॉलेज ही सही समय होता है
09:19जब कई तरह की तुम दूसरी रीडिंग भी कर सकते हो
09:23लाइब डेरी से किताबे उठाके लाया करो
09:26दुनिया भर का साहित बचा हुआ है पढ़ने को कब पढ़ोगे
09:29अपने दिन को सार्थक कर्मों से बिलकुल ठूस ठूस कर भर दो
09:35एक एक मिनिट से पाँच पाँच मिनिट की कीमत निकालो
09:40सवाल ये होना चाहिए कि जब जग रहें तब क्या करें
09:48जब सवाल ये हो जाता है तो नींद वाला सवाल गायब हो जाता है
09:51ठीक है यह सर थैंक यू सर नमस्ते सर नेरा नाम निविद्धा मंडल है मैं निटी रमशेपूर की सेकंड यह की स्टुडेंट तो अगर हम पहले ही डिसाइड कर ले कि हम किसी चीज को अचीज नहीं कर सकतो
10:21तो सर हमें अपना प्रोटेंशिल क्या से पता चलेगा यह कौन कह रहा है कि यह डिसाइड कर लो कि कोई चीज अचीज नहीं कर सकते
10:29पहले यह देखो कि तुम्हें क्या अचीज करने की जरूरत है तुम्हें सचमुच क्या चाहिए
10:36तो मैं सचमुच क्या चाहिए ये देखो
10:42ये सुनने में देखो कितना अजीब सा लग रहा है
10:46कि हम किसी चीज को अचीव करना चाहते है
10:48वो आदमी कैसा होगा जो रेस्टराउ में घुसे
10:52और उससे पूछा जाए क्या ओडर है
10:54वो बोले मैं किसी चीज को खाना चाहता हूँ
10:56ये किसी चीज क्या होता है
10:59एक आदमी वो फार्मेसी पर गया हो पूछे क्या दवाई दूँ
11:02वो बोले मुझे किसी चीज की दवाई दे दो
11:04ये आदमी कैसा लगेगा
11:06पगला हम सब ऐसे ही तो है
11:08हम कोई चीज़ अचीव करना चाहते है
11:11गीता कहती है पहले जानो तो सही कि दुनिया में पाने लायक है क्या
11:15और अगर तुम्हें ये जानना है कि दुनिया में पाने लायक क्या है
11:19तो तुम्हें जानना पड़ेगा कि तुम्हें क्या पाने की जरूरत है
11:24तुम्हारी अत्रिप्त का मूल कारण क्या है कौन सी चीज़े तुम्हें मिल जाए तो बिल्कुल बाग बाग बल्ले बल्ले हो जाओगे
11:34वो पाना बहतर रहेगा कि नहीं अगर जिन्दगी इसलिए भी है कि पाओ मान लो
11:42तो हम वो पाने निकले ना जिसको पा करके एकदम आनन्द ही आ जाए या ऐसी चीज़ें कि जैसे कोई ला भी नहीं जिन चीज़ों से
11:51आपको कोई बता दे कि जिन्दगी का उद्देश यह है आसमान पे चड़ जाना और इसके लिए सीड़ी सीड़ी पकड़ो जा करके
12:01और जहां पे सबसे महंगी सीड़ी मिलती हो ले करके आओ और आप दौर लगा रहे है उस सीड़ी
12:06खरीदने की सारी अपनी पूझी सीड़ी पर लोटा दी इसमें कुछ रखा है ये पहले पता तो होना चाहिए न कि उपर चड़ना भी है या नहीं
12:19मचली को सीड़ी से उपर चड़ा दिया आसमान में अब क्या होगा मचली का
12:24मचली को चाहिए थी गहराई और उसको ले जाकर के सौवी मंजल पर आसमान में टांग दिया है अब क्या होगा उसका
12:37आपको क्या चाहिए पहले ये तो पता करो न और ये आपको बताता हूँ जो कुछ भी आम तोर पर भीड आपको बताती है आपको वो तो नहीं चाहिए
12:49क्योंकि जो कुछ भी आपको आपके शरीर ने और समाज ने बता दिया है
12:54आप वो हो नहीं
12:56जवाब वो हो नहीं जो आपको बता दिया गया है
12:59तो आपको वो चाहिए कैसे हो सकता है जो सब लोग चाह रहे है
13:03जिन्दगी बर्बाद करने का निवेदिता
13:07बिल्कुल एक निश्चित तरीका ये है
13:11कि जो सब कर रहे हैं वही आप भी करो
13:13जिन्दगी आबाद कैसे होनी है
13:19इसको लेके अलग-अलग मत हो सकते हैं
13:22पर बर्बाद करनी है
13:23तो जो सब करते हैं वही आप भी कर लो
13:25एकदम पक्का है कि बर्बाद हो जाएगी
13:29जो शब्द इस्तेमाल किये कि मुझे अपना potential realize करना है
13:36जो potential शब्द है ये बहुत खुबसूरत शब्द है
13:39इसको समझना पड़ता है कि potential माने क्या
13:43अगर मैं अभी एक हालत में हूँ
13:48तो मुझे उससे बहतर होना है
13:52बहतरी का अर्थ क्या है, definition क्या है
13:54समझ रहे हो बात को
13:58और जो चीज एक चीज को बहतर घोशित कर सकती है
14:06वो दूसरी चीज पर नहीं लागू होती है वो चीज
14:08गाड़ी गंदी पड़ी हुई है, सफेद रंकिया आपकी गाड़ी है
14:12गाड़ी गंदी पड़ी हुई है पूरी
14:14कीचड से लगफथ होकर आईए
14:17टायर की बहतरी अब इसमें है कि वो और ज्यादा काला दिखे
14:22और बॉडी की बहतरी इसमें है कि वो और कम काली दिखे
14:29जो चीज एक को बहतर बनाती है वो दूसरे को बदतर बनाती है
14:35सब पर एक ही सिद्धान तो नहीं लागव हो सकता न
14:39वैसे ही आपकी जिंदगी है आप पर क्या लागव होता है यह आपको खुद देखना पड़ेगा
14:45यही आत्मग्यान है
14:47मैं कौन हूँ मुझे कौन सी चीज बहतर बनाती है
14:51मैं टायर हूँ अगर आप टायर है तो आपको बिलकुल शाइनिंग ब्लैक होना चाहिए
14:56और अगर आप बुनट है तो आपको कुछ और होना चाहिए आप बंपर है तो कुछ और होना चाहिए
15:01आप कौन है
15:02तायर का पुटेंशिल यह थोड़ी है कि वह एक दम चिकना चिकना हो जाए चिकने टायर देखे ना तूर से ही देखिएगा बैठ मद जाएगा उस गाड़ी में वहले पुटेंशिली मैं एक चिकना टायर हूँ बताव क्या होगा गर्वड हो जाएगी ना लेकिन अच्छा ह
15:32कि उपनाइगे बन data की जाएगी उसमें भी गृवव डाले हुए है मीडि भ्लिक आईगी ने वीवन स्क्रीन हो गाईगें तो भी एक्चिडंट हो गया अर्वन already
15:42अप पता तो करो आप कौन हो और आपको क्या होना एक्रिफ्या विच पå
15:53सुलजने से पहले
15:57उलजना जरूरी होता है
15:59सुलजाव हो सके
16:02इसके लिए पहले पता तो करना पड़ेगा
16:04कि बहुत उलजे हुए है
16:05कुछ नहीं सपश्ट हुआ होगा
16:10सारी बात बिकार गई
16:1220 मिनिट
16:12जीता पढ़नी पड़ेगी
16:14नहीं सपश्ट हो गया सब
16:23आप लाखों लोगों को गीता पढ़ाते हैं
16:26और समझाते हैं
16:28सर मैंने तो गीता पढ़ा नहीं है
16:30परंतो सर मेरा आपसे एक प्रश्ण है
16:33कि सर क्या
16:34क्रोध को नियंतरित करने को लेकर
16:37गीता में कुछ लिखा है
16:38अच्छा मैं अगर बोल दूँ हां लिखा है
16:45और ना लिखाओ तो
16:46इतनी तो
16:51भारी भरकम
16:53या विस्तरित है भी नहीं न गीता
16:55गीता पता है कितनी छोटी सी है
16:58यह जैसे इनकी जो डाइरी है
17:03लाओ दिखाओ
17:03इतने में अनुवाद के साथ
17:07पूरी गीता आ जाती है
17:08इतने में
17:11आप तो
17:13एंट्रेंस होगारा क्लियर करके निटी पहुचे होगे
17:15न तो इससे तो कहीं ज्यादा भारी भरकम
17:19किताबें आप पढ़ पुड़ा करके फिर वहाँ
17:21पहुचे हो और अभी आपके सेलबस में भी पता
17:23नहीं क्या क्या होगा यह मूटी मूटी किताबें
17:25लिए माभारत का एक प्रतिशत नहीं हैं गीता लेकिन माभारत भी पता होती है
17:41कम जगाम उसके जो मुटी मुटी बाते हैं वो तो सबको पता है गीता मेरी सला है कि कम से कम शुरुवात करिए एक बार स्वयम देखने से उससे आप पर कुछ प्रभाव पड़ेगा आप कुछ अनुमान लगाएंगे कि यह लिखा है आप जो अनुमान लगाएंगे बिलकु
18:11कई बार तो विक्रत भी होते हैं लेकिन आपको कुछ उसमें से एक अनुमान लगेगा कि क्या है और उसके बाद फिर आप गीता को पूरा ही पढ़ना शुरू करिए सवाल आपने क्रोध पर पूछा है ठीक है मुझे पता है आप इंजार कर रही होंगे कि मैं क्रोध पर क�
18:41गीता आपने नहीं पढ़ए होगी पर गीता के बारे में आपने खूब पढ़ रखा होगा पढ़ा है कि दो नहीं पढ़ना चाहें तो इसको तो मितनी बुरी तरह तोड़ दो गिए को कुछ लायक न रहे यह सचमुच चल रहा है और उसमें कोई टीवी कलाकार है उसकी श
19:11किसी टीवी सीरियल हो गारा में
19:12अब लोगों को लगा गीता में सच मुझ लिखा है कि जिसने तुमारा दिल तोड़ा उसको तोड़ दो ताकि यो किसी को तोड़ने लायक ना रहे
19:19वैसी मैं कुछ बोल दूँगा आपकी मजबूरी हो जाएगी मेरी बात मानना
19:24तो मैं इसलिए बोल रहा हूँ आप किसी की बात पर यकीन मत करो मेरी बात पर यकीन मत करो
19:29हाला कि अभी मैं दूँगा आपके प्रश्न का उत्तर लेकिन मैं कुछ भी बोलूँ उससे बहतर यह है कि स्वयम कृष्ण आप से बात करे ना
19:36अगर सुनी सुनाई बातों पर ही चलना होता तो वो अपने पीछे अपना संदेश क्यों छोड़ गए होते
19:44उन्होंने इसलिए दिया है न क्योंकि वो आप से एक निजी रिष्टा रखना चाहते है
19:50तो कृष्ण बोल रहे हैं भई मुझे निवेदिता के लिए कोई बात छोड़नी है
19:56निवेदिता आएगी निवेदिता को संसार में पैदा होने पर तमाम तरह के भ्रहमों का सामना करना पड़ेगा
20:04और कुछ बाहरी चीज़े होंगी और बहुत क्रोधी भी है शायद निवेदिता भीतर से उसको गुस्सा आजाता है
20:09तो वो बोले कि ठीक है यह सब होता है सब के साथ
20:12तो मैं निवेदिता के लिए अपने आपको छोड़े जाता हूँ
20:16अब शरीर से नहीं छोड़ सकता तो मैं गरंथ में छोड़े जाता हूँ अपने आपको
20:19तो यह तो आपके और कृष्ण के बीच का एक मधुर रिष्टा है
20:24इसमें तो काईदे से मेरी ज़रूरत भी नहीं होनी चाहिए नहीं होनी चाहिए न और जो उन्होंने आपके लिए बाते छोड़ी है
20:32वो कुछ ऐसा नहीं है कि किसी ने बस मात्र इसनेहे में छोड़ दिया है
20:37वो अपने आप में पूरा विज्ञान है
20:39उसके पीछे पूरा एक गहरा दर्शन है
20:44उस दर्शन को बोलते हैं वेदांत
20:46गीता ऐसे ही किसी ने कुछ नहीं बोल दिया है कि मुझे कुछ लग रहा है तो मैं बोले दे रहा हूँ
20:51जो हाँ बात बोली गई है वो एक फिलोसफी पर अधारित है
20:54विज्ञान है पूरा बहुत बात प्रमान के साथ बोली गई है
21:01अनुमान से नहीं प्रमान से
21:03ठीक है तो गीता पढ़नी है अब मैं बताए देता हूँ क्रोध को ले करके
21:10लेकिन उसे आप पढ़िएगा जरूर और अगर समय हो तो गीता पर मैं बात कर ही रहा हूँ
21:17उस बात से अगर किसी तरीके से जोड़ सकते हो तो आप ज़रूर जोड़िएगा
21:22संस्था से आपने जिन भी लोगों से संपर्क करा है उनसे पूछिएगा वो आपको बता देंगे
21:27नहीं भी अगर संस्था से पूछना है तो आप गूगल कर लीजएगा वहाँ ही पता चल जाएगा
21:31क्रोध आता है कामनाओं के पूर्ण ना होने से ये कहती है गीता
21:41कामना के पूर्ण ना होने से जो मन की इस्थित होती है उसको बोलते हैं क्रोध और कामना आती है अहंकार की अस्थित्वगत अपूर्णता से
21:55तो जहां अहंकार है वहां क्रोध को आना पड़ेगा
21:59और आगे अभी क्रश्न कहते हैं कि जब क्रोध आ जाता है
22:04तो बुद्धी चले जाती है बिल्कुल घास चरने
22:06तो आदमी और सौतरे के ऐसे काम करता है
22:11जो फिर उसके अज्यान को और बढ़ाते ही है
22:14क्रोध आया कामना से कामना आई अपूर्णता से
22:21अपूर्णता आई अज्यान से ठीक है
22:24क्रोध के पीछे कामना कामना के पीछे अपूर्णता
22:28अपूर्णता के पीछे अज्यान ये गीता का दर्शन है क्रोध को लेकर
22:32अहम जो होता है न अहम मने मैं हम पैदा होते हैं न हमें लगातार ये भावना रहती है कि हम आधे अधूरे है
22:40छोटा बच्चा देखा हाथ कैसे फेकता है इधर उधर कुछ भी पकड़ने के लिए
22:46करवट भी नहीं बेल सकता है इतना छोटा होता है कई बार लेकिन वो क्या कर रहा होता है
22:51हाथ पाँ चला रहा होता है
22:54और आप देखिएगा उसके कुछ भी
22:57अभी ताकत नहीं है शरीर में
22:59लेकिन ऐसे ना उसको आप ऐसे उंगली दीजिएगा
23:01अपनी ऐसे बस ऐसे दिखाईएगा
23:03और बहुत जोर से आपकी उंगली पकड़ लेता है कई बार
23:05किसी छोटे बच्चे के बहुत ही छोटा वाला उसको देखिएगा
23:10आप कहेंगे इसके तो कोई जान नहीं है दो महीने चार महीने का है
23:13लेटा रहता है लेकिन आप ऐसे थोड़ा ता अपना हाथ दीजिए उंगली दीजिए
23:17वो ऐसे ऐसे उंगली पकड़ लेगा
23:19हम पैदा ही होते हैं ऐसे क्या
23:23पकड़ते हुए जकड़ते हुए क्यों क्योंकि हम हैं भीतर से अपूर्ण
23:29अपूर्ण
23:31और जो अपूर्ण है उसकी मजबूरी हो जाती है क्या
23:35कामना
23:37और जहां कामना है कामना के पीछे भागोगे
23:41कामनाएн पूरी तो हो नहीं सकती, तो फिर क्रोध आएगा।
23:47इसलिए अपूर्णता के पीछे कहा गया है अज्ञान।
23:51तुम स्वयम को जानते नहीं, इसलिए तुम्हें लगता है कि तुम आधे अधूरे हो।
23:56तुम स्वयम को जानते नहीं, तुमने मान लिया कि तुम आधे अधूरे हो, जब तुम आधे अधूरे हो, स्वयम को न जानने के कारण, तो उसी न जानने की इस्थिति से तुम अपनी कामना का भी चुनाओ कर लेते हो, कि फलानी चीज मिल जाए तो अधूरापन हट जाए�
24:26कामना में जो चीज मांग रहे हो कभी मिलनी नहीं है क्योंकि कामना ही गलक चीज की कर रहे हो
24:32अरे भाई मैं यही नहीं जान रहा कि मुझे बीमारी क्या है
24:36तो उस बीमारी को हटाने के लिए मैं जिस दवाई की कामना करूँगा वो कामना सही होगी गलत होगी
24:43बोलिए
24:46मेरी नाक में दर्द है
24:48पर मैं अज्यानी हूँ
24:49तो मुझे लग रहा है मेरी पीठ में दर्द है
24:52ठीक है
24:54अभी सुनने में लगा ऐसा तो कोई होता नहीं
24:56हम सब ऐसा ही होते है
24:57नाक में दर्द है
25:00पर अज्यानी हूँ
25:01समझ नहीं रहा कि माजरा क्या है
25:02तो मैंने मान लिया है कि दर्द कहा है
25:05पीठ में है
25:06तो अब मैं जो कामना करूँगा
25:08वो किस चीज को मिटाने की होगी
25:10पीठ के दर्द को
25:12अब मैं चला गया कहीं से जा करके
25:14पीठ के दर्द की दवाई ले आया
25:15अब वो दवाई मैंने खूब खा भी ली
25:18उस दवाई को खाने से क्या होगा
25:21पीठ में दर शुरू हो जाएगा
25:23और नाक का दर जैसा था
25:25वैसे ही रहेगा
25:26तो अब मुझे आएगा
25:28कुरूद
25:29Anger is the frustration of desire
25:33कामना का काम ही यही होता है
25:35कि आपको अंतत्व frustration दे बहुत सारा
25:38frustrated आदमी को देखा
25:40कैसा हो जाता है मुझ
25:41बहुत सारा मांगनी के लिए निकले थे
25:44और चेहरे पर एकड़म लालश्ट पकरा था
25:46कि आज तो कामना पूर्ती होई जाएगी
25:48और फिर कामना पूर्ती हुई नहीं तो मुझ कैसा हो जाता है
25:51उसको कहते हैं Anger
25:54और उसी Anger का जो दूसरा पक्ष पहलू होता है
26:00उसको कहते हैं अवसाद
26:01कई बार जब कामना पूरी नहीं होती
26:04और आप में जान बची है तो क्रोध आता है
26:06और कामना जब सोवार पूरी नहीं होती
26:09और जान बचती नहीं है आप गुस्टा भी करने कि
26:12तो फिर आप आउसाद में चले आता है
26:13आुसाद माने गहन निराशा
26:14तो उसी क्रोध का
26:18जो दूसरा पक्ष होता है, वो होती है
26:20गहरी निराशा, कि कुछ होता तो है नहीं
26:22सौवार आजमालिया
26:24कुछ होता तो है नहीं, तो फिर आज आता है
26:26आउसादब
26:27मिन्हें कामना पूरी नहीं हुई
26:30और रजो गुड़ी आदमी है
26:32तो क्रोधित हो जाएगा और तम्मो गुड़ी है
26:34तो सो जाएगा
26:35सो जाएगा क्या बोलके
26:38कुछ होना होना है नहीं मा आगे भी कुछ नहीं करूँगा
26:41सबसे बढ़िया कामना यही है कि खाओ पियो सो जाओ
26:43कुछ नहीं करना जहाँ हो पड़े रहो
26:45इन दोनों में ही साजी बात क्या है
26:49दोनों जानते ही नहीं कि कावना कौन सी करनी है
26:52और युवाओं के लिए एक इतनी खतरनाग बात है
26:55कि वो अपने जीवन में लक्षे बनाएं
26:58और प्रेत्न करें, इस दिशा में बढ़ें
27:00कभी नौकरी चुनें, कभी साथी चुनें
27:02कभी व्योसाय चुन रहे हो
27:04कभी जिन्दगी की दिशा चुन रहे हो
27:06और ये जान भी नहीं रहे कि किस दिशा जाना चाहिए
27:10बस अंधी दिशाओं में बढ़े जा रहे हो
27:12दोड़ रहे हो, ठोकरे खा रहे हो, गिर रहे हो
27:14ये कितनी खतरनाग बात है न
27:16तो इसलिए अगर क्रोध आता है
27:19तो कामना को देखो
27:21जब कामना को देखो तो कामना के मूल का पता चलेगा
27:25कामना के मूल का पता चलने को ही ग्यान कहते है
27:28ग्यान का अर्थ है आत्म ग्यान
27:30आत्म ग्यान के बिना, सेल्फ नॉलेज के बिना
27:35अपने गोल्स, टार्गेट्स कभी भी नहीं बनाना
27:38एकदम नहीं बनाना
27:40यह नहीं कि सब लोग जा रहे हैं करियर उस तरफ को बनाने के लिए
27:45तो हमने भी बना लिया
27:46कहीं पर आजकल सब लोग जमीन खरीद रहे हैं घर खरीद रहे हैं
27:51तो हमने भी खरीद लिया
27:52सब फलाना कोर्स करते हैं तो हमने भी कर लिया
27:55सब एक तरह कपड़े पहन रहे तो हमने भी पहन लिये
27:57ऐसे नहीं करते
27:58कामना हमेशा कहां से आनी चाहिए
28:03ज्ञान से
28:05और जब ज्ञान से कामना आती है
28:07तो उस कामना के लिए एक विशेश नाम होता है
28:10उसको बोलते हैं निश कामना
28:11वो भी एक तरह की कामना ही है
28:15पर कामना का केंदर बदल गया
28:17जब अज्ञान से कामना आती है
28:19तो उसको कहते हैं कामना
28:20और जब ज्ञान से कामना आती है
28:23तो उसको कहते हैं निश्कामना
28:25वो भी कामना ही होती है
28:27और इतना आप समझेगा
28:28कि जितना जोर निश्कामना में होता है ना कामना में कभी होता ही नहीं होता ना कामना की ताकत कभी निश्कामना की ताकत का मुकाबला नहीं कर सकती
28:39कामी की हार पक्की है जिस दिन निश्कामी के पल्ले पड़ गया
28:44कामी और निश्कामी में युद्ध हो रहा है
28:47निश्कामी निश्चित रूप से जीतेगा
28:49इसलिए तो कृष्ण अर्जुन को निश्काम सिखा रहे है
28:56वो वास्ताव में सुनिश्चित कर रहे हैं कि युद्ध में अर्जुन ही जीते
28:59जो निशकाम हो गया है उसको आप हरा नहीं सकते अब
29:08कुछ आघी बात समझ में है
29:10छोटी मोटी कामना जब असफल रह जाती है तो करोध आता है
29:16निशकामना में करोध आई नहीं सकता
29:20क्योंकि ऐसा कुछ मांगा ही नहीं
29:23जिसमें न मिलने की भी संभावना हो
29:25क्रोध तो तब आएगा ना जब ये मांगा था ये रा चश्मा ये मांगा ये मिला नहीं तो गुस्सा आ गया ठीक है और जब कर्म ऐसे करा जाता है कि कर्म को करने में ही आनंद है कर्म को फल में आनंद नहीं है तो बताओ गुस्सा कैसे आ सकता है क्योंकि आपकी हार तो हु�
29:55यह आ गया था, यह यह बंदर आ गया, इसको मैंने हराया, फिर कोई और आ गया, जो चश्मा चुराना चाहता था, मैंने उसे घूसा मारा, अब यह सब मैंने इतनी सारी चीजें करी, किसी ने पैसे मांगे, चाहिए तो पैसे दो, मैंने पैसे भी दे दिये, अब मैंने इतनी
30:25बिल्कुल भी नहीं करा होता है
30:27अब एक दूसरा व्यक्ति होता है
30:28वो निश्कामना से चलता है
30:30वो कैसा होता है
30:31वो बुलता है कि ये जो चश्मा है
30:34ये
30:35कोई औरी चीज है
30:37उसका जो लक्ष है वो कोई औरी चीज है
30:39वो कहता है
30:40लक्ष इतना बड़ा है
30:42कि उसको पूरी तरह तो कभी पा नहीं सकते
30:45तो आनंद इस लक्ष को पाने में नहीं है
30:48आनंद इस लक्ष की और बढ़ने में है
30:51अब बताओ इस आदमी की कामना कैसे अपूर्ण रह जाएगी
30:55क्योंकि इसको तो आनंद मिल गया
30:58बढ़ने में ही
30:59जो आनंद किसी को मिलने वाला था कर्म फल को पाने में
31:04निश्कामी को वो आनंद मिल गया कर्म के अंदर ही
31:07दूसरा व्यक्ति इंतजार कर रहा था कि कब कर्म के बाद कर्म फल मिलेगा
31:12तो आनंद मिलेगा
31:14निश्कामी को तो कर्म करने में ही पूरा आनंद मिल गया
31:17तो फल मिला नहीं मिला
31:20वो उदासीन हो जाते हो
31:22कहता है फल का क्या करना है कर्म में ही आनंद है
31:24तो जब कर्म में ही आनंद होता है
31:27तो गुस्टा किस बात पर आएगा बोलो
31:28किस बात पर आएगा
31:31मुझे तो मिल गया मैं तो पहल लूँगा
31:33हीरा पायो गाठ गठी आयो
31:37समझ में आ रही है बात
31:41क्या समझ में आ रहा है
31:44जब भी कुछ ऐसा मांगोगे
31:47जिसमें आपकी खुशी
31:51मांगी हुई चीज के मिलने पर आशरित है
31:54तो फिर फ्रस्ट्रेशन की और क्रोध की
31:58गुणजाईश हमेशा रहेगी
32:00वो चीज नहीं मिली तो भी क्रोध हाएगा
32:03वो चीज मिल गई तो थोड़ी देर वो खुशी आएगी
32:06फिर थोड़ी देर में वो चीज पुरानी पड़ जाएगी
32:07फिर गुस्सा आजाएगा
32:09मिल के भी नहीं मिली
32:11या अच्छा हुआ ना मिलती बहतर रहता
32:14बेकार में इतनी मेहनत करी
32:16मिल गई तो धोखा हुआ
32:18कि जैसे पता नहीं क्या बात बन गई
32:19बात भी नहीं बनी चीज भी मिल गई है
32:22ग्यान में काम ऐसे करा जाता है
32:27कि काम ही अपना पुरुसकार है
32:30इसको निश्काम ना कहते है
32:32ग्यानी ऐसे नहीं काम करता है
32:35कि फलानी चीज हासिल कर लूँ
32:36ग्यानी ऐसे करता है
32:38कि समझ गया हूँ मामला क्या है
32:40अब काम करने दो
32:42हासिल वगरा करने में
32:44तो वैसे भी कुछ रखा है नहीं
32:46मज़ा है
32:48काम में
32:49अब जब काम में ही मज़ा है तो क्रोध किस बात पर आएगा
32:53क्रोध किस बात पर आएगा
32:57लेकिन मैंने जितना भी बताया
33:03ये गीता के बुकाबले का नहीं है
33:05गीता तो खुदी पढ़नी पड़ेगी
33:08इसलिए बात अभी पूरी तरह समझें भी नहीं आ रही होगी
33:12अज्ञान से उठी कामना
33:16क्रोध को जन्म देती है
33:18और ज्ञान से उठी कामना
33:23में फल कर्म में ही नहित होता है
33:26नहित माने बैठा होता है
33:28इंट्रिंसिक होता है
33:29तो इसलिए उसमें क्रोध हो गयरा नहीं आता
33:32क्योंकि आप कोई विशेश चीज चाही नहीं रहे थे
33:35हाँ हो सकता है कि आप जो कर्म कर रहे हो
33:39उसमें बीच में किसी चीज की जरूरत पड़ती हो
33:41पर वो चीज नहीं भी मिली
33:42तो आप कहते हो कर्म थोड़ी रुख जाएगा
33:44या जो मैं उपकरम कर रहा हूँ
33:46जो मेरा प्रोजेक्ट है वो सफल थोड़ी हो गया
33:48ऐसे नहीं हुआ तो
33:49वैसे होगा
33:51क्योंकि जो मैं काम कर रहा हूँ वो तो मुझे कर नहीं है
33:54वो तो कर नहीं है
33:56मैं समझ गया हूँ कि यही काम हसली है यही जरूरी है
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