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  • 2 days ago
कर्नाटक के बेलगावी के कुद्रेमनी गांव को आर्मी विलेज होने का गौरव हासिल है. इस गांव में 350 से ज्यादा सैनिक हैं. इस साल 9 और युवाओं ने भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों में एंट्री लेकर गांव का मान बढ़ाया है. गांव के लिए खुशी की बात ये भी है कि जिन नौ युवाओं ने परीक्षा दी, सबके सब अंतिम रूप से चुन लिए गए हैं.  बेलगावी शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर कर्नाटक और महाराष्ट्र के बॉर्डर पर बसे कुद्रेमनी गांव में ज्यादातर लोग मराठी बोलते हैं. करीब 7 हजार की आबादी वाले इस गांव के ज्यादातर लोग खेतीबारी करते हैं.कुद्रमनी का मिलिट्री इतिहास 1965 से शुरू होता है.. जब जीवन गोवेकर गांव से पहले सैनिक बने.. फिर ये सिलसिला चल पड़ा.. हर साल कम से कम 7 युवा इस गांव से सेना में चुने ही जाते हैं.  गांव के लोगों में सेना का अनुशासन देखा जाता है. रिटायर्ड कर्मी युवाओं को ट्रेनिंग देते हैं और परीक्षा की तैयारी कराते हैं.  सेना में जाने को इच्छुक युवा रोज तगड़ी प्रैक्टिस करते हैं. कुद्रेमनी के लोग सिर्फ करियर के लिए सेना में नहीं जाते, बल्कि पहचान के लिए जाते हैं और एक पीढ़ी दूसरे को अनुशासन, सेवा और बलिदान की सीख देती है.  

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Transcript
00:00One town where 350 people are more than likely.
00:07The town of Karnatak is called Army Village.
00:17This year the town of Karnatak and the town of Karnatak
00:24गाउं के लिए खुशी की बात ये भी है कि जिन नौ युवाओने परिक्षादी सब के सब अंतिम रूप से चुन लिये गए हैं
00:31बेलगावी शहर से 20 किलो मिटर दूर करनाटक और महराश्टर के बौडर पर बसे कुद्रेमनी गाउं में
00:54ज्यादा तर लोग माराथी बोलते हैं करिब 7000 की आवादी वाले इस गाउं के ज्यादा तर लोग खेती बारी करते हैं
01:02आम फोर्स में जाकर मैंने अपने बड़े भाई का सपना साकार किया जो आर्थिक तंगी के चलते आंगे नहीं बढ़ सके
01:09मैं खुस हूँ कि मैं सफल हुई लेकिन जादा खुश इसलिए हूँ क्योंकि मेरे बड़े भाई का सपना साकार हुआ
01:15कुद्रे मनी का मिलिटरी इतिहास 1965 से शुरू होता है जब जीवन गोवेकर गाउं से पहले सैनिक बने फिर ये सिल्सिला चल पड़ा हर साल कम से कम साथ युबा इस गाउं से सेना में चुने ही जाते हैं
01:32मेरे पिता ने सेना में जाने का सपना देखा था लेकिन नहीं जा सके उन्होंने मुझे सेना में भेजने और देश की सेवा करने का सपना देखा मुझे विश्वास है कि मैं गाउं को गरवानवित करूंगी
01:44अपनी एक मात्र बेटी को सेना में भेज कर मुझे खुसी हो रही है
01:52नौ प्रत्यासियों के सफल होने से पूरे गाउं में उत्फो जैसा महौल है
01:57बेटी का आर्मी में जाना उसका और परिवार का सपना था
02:03गाउं के लोगों में सेना का अनुशासन देखा जाता है
02:06सेना में जाने को इच्छुक युवार रोज तगड़ी प्रेक्टिस करते हैं
02:15कुद्रे मनी के लोग सिर्फ करियर के लिए सेना में नहीं जाते बलकि पहचान के लिए जाते हैं
02:20एक पीड़ी दूसरे को अनुशासन सेबा और वलिदान की सीख देती है
02:25Bureau Report, ETV, Bharat
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