Skip to playerSkip to main content
  • 23 hours ago

Category

📚
Learning
Transcript
00:00एक बच्चे के पैदा होने का मतलब है कि आपने लाखों जानवर मार दिये और लाखों पेड काड़ दिये
00:04अब 3-4 बच्चे हो गए हैं तो घर बड़ा लेना पड़ेगा इतने सारे लोग के आए कि स्कूटर में बैठके चलेंगे तो अब गाड़ी भी लेनी पड़ेगी
00:10पॉपुलेशन बढ़ी, फोरेस्ट, घटा जब तक हम इनसान को ही नहीं बदलेंगे, हम देश को कैसे बदल सकते जैसे एक अमीर आदमी दूसरे गरीब के उपर चड़के बैठता है वैसी एक अमीर देश भी तो गरीब देशों पर चड़के बैठेगा ना खेत कहां से आ
00:40साइकल सब एक्टिवेट हो गए, उनको रोक लोगे क्या? मैं एक इंसान हूँ जो पैदा हुआ है भोगने के लिए इंसान अगर बत्तमीजी ना करे तो प्रत्वी में कितने एक शेतर पर जंगल होंगे? कैसे रुकेगा? बात किसके हाथ में? बात आपके हाथ में. गीता �
01:10जो forest loss है और जो population का करव है वो देखो, आप पैदा होते हैं. जब मैंने कहा कि एक बच्चा अगर आज पैदा होता है, तो हजारों लाखों पौधों और पश्वों और पेडों की लाश पर पैदा होता है तो लोगों को बड़ा बुरा लगा. बोले, ऐसे क्यों बोल रहे ह
01:40अगर बच्चा पैदा होता है, तो एक बच्चे के पैदा होने का मतलब है कि आपने लाखों जानवर मार दिये और लाखों पेड़ काट दिये. क्या मैंने गलत कहा? पहला और आखरी कर्व देख लीजिए. इसमें आप और भी कर्व एड़ कर सकते हैं.
01:57material production, हम कितना industrial production कर रहे हैं प्रतिवर्ष, वो कर्व भी बिलकुल ऐसा ही है. वही अज्ञान की वृत्ति जो हमें मजबूर करती है, और बच्चे पैदा करो, और बच्चे पैदा करो, वही वृत्ति हमें कहती है कि अब भोगो भी तो, और चीजें होनी चाहिए, अब तीन-
02:27क्या एक स्कूटर हम बैठके चलेंगे तो अब गाड़ी भी लेनी पड़ेगी, जिसको हम कहते है ना, family is the unit of society, थोड़ा सबर से सोचिएगा, family is the unit of consumption, हमारी पारिवारिक और सामाजिक विवस्था बनी ही इसलिए है कि हम अपनी तादाद बढ़ाएं और खुशहाली के ना
02:57लगभग 1850 तक भी उचल जाता, 1900 तक भी चल रहा था, अब नहीं चल सकता, तो कोई ये तर्क न दे कि अरे, हजारों सालों से जो विवस्था चली आ रही हो तोड़ दे क्या, हजारों सालों से ये नहीं हो रहा था, अब जो हुआ है, यकायक हुआ है और बहुत जबरदस्
03:27कि पढ़ाई क्यों की है, ताकि पैसा आ जाए, ताकि घर खरीदू, ताकि ये करूँ, वो करूँ, पचास काम करूँ, नई इंडस्ट्री लगानी है, जंगल काटने है, मैंस कॉंकेस्ट आफ नेचर, ये सब करके दिखाना है, और हैपी लाइफ का मतलब ये है, कि देखो म
03:57नहीं होगा, वो ये देखेगा, ना, ये सब आकडे हैं, या मैं बस बकवास ही करता रहता हूँ, हम इन से बहस कर सकते हैं, और आप बहस करके, मुझे रोक सकते हो, जो feedback cycle सब activate हो गए, उनको रोक लोगे, क्या, रोक लोगे,
04:23हमने कहा, forest सबसे बड़ा सिंख होता है, अगर हम यहाँ पर एक कर्व और लिखा पाएं, कि प्रत्वी के पूरे एक शेत्रफल का कितना हिस्सा, जंगलों द्वारा आच्छादित था,
04:41तो आपको एक बड़ी सबर्दस चीज देखने को मिलेगी, पचास प्रतिशत, एक बहुत लंबे अर्से तक, प्रत्वी के पचास प्रतिशत क्षेत्र पर जंगल थे,
04:5750%, अभी कितने हैं, 30, पचास से नीचे ये प्रत्वी चली नहीं सकती, अगर वैसे समझो, तो इंसान अगर बत्तमीजी ना करे, तो प्रत्वी में कितने एक शेत्र पर जंगल होंगे,
05:15दो शेत्रों को अगर तुम हटा दो, दो तरह के डिजर्ट होते हैं, एक cold डिजर्ट और एक hot डिजर्ट, उनको हटा दो तो हर जगए, जंगल ही जंगल होगा, लगभग पूरी प्रत्वी ही जंगल ही होगी,
05:32जो सबसे ठंडी जगह होती है न, वहाँ भी बड़े जबर्दस जंगल होते हूं, उन्हें borial forests बूलते हैं, जो Siberian forests, Coniferous forests थी सब होते हैं सब,
05:44वहाँ भी जंगल होते हैं
05:46इंसान की बत्तमेजी से पहले लगभग पूरी प्रत्वी जंगल थी
05:50रेगिस्तान को हटा दो और जो एकदम ही बर्फ से ढखे हुए क्षेत्र है उनको हटा दो तो
05:56उसको घटाते घटाते हम 30 प्रतिशत पर ले आएं
06:0230 प्रतिशत भी सरकारी आकड़ा है
06:04इसमें क्वालिटी ऑफ जंगल जब तुम शामिल करते हो
06:08तो और ज्यादा धक्का लगता है
06:10सरकारें किसी तरह अपना पिंड छुडाने के लिए
06:18कहीं पर जहां बहुत कम प्री डेंसिटी हो
06:25उसको भी क्या डेकलियर कर देती है
06:28कि ये तो फॉरेस्ट है
06:30कहीं पर यूनिकल्चर मोनोकल्चर कर दिया
06:36उसको भी क्या बोल देते हैं कि ये तो फॉरेस्ट है
06:39फॉरेस्ट ही नहीं है
06:46तो कौन सोखेगा कारबन
06:48और फॉरेस्ट हो नहीं सकते
06:50आप आबादी बढ़ा रहे हो वो कहां रहेगा
06:53उसके खाने के लिए
06:57अनुगाना पड़ेगा न
07:00खेट कहां से आएंगे
07:03जंगल काटके ही तो खेट बनेगा
07:06और हमारा फॉरेस्ट कवर
07:16हर साल और कम होता जा रहा है
07:20कुल 4,000,000,000 hectare
07:30हमारे पास फॉरेस्ट है प्रत्वी पर
07:34और लगबत पिछले 10 सालों में ही हमने उसमें से 500 हटा दिया
07:40हम इतनी जल्दी में है
07:43कम ओन बेबी, मेक इट फास्ट
07:46हम बहुत जल्दी में है
07:50सबसे ज़्यादा कहा हटाया जाता है मालूम है
07:56गरीब देशों में
07:57जैसे भारत
07:592015 से 2020 के बीच में जिन देशों में सबसे ज़्यादा फॉरेस्ट कवर
08:05हटाया गया उन में से एक भारत है
08:07जल्दी से जल्दी डेवलोप्मेंट मांगता
08:12और सबसे वेल्फ प्रिजर्व फॉरेस्ट कौन से है
08:20जो आपके टेंपरेट फॉरेस्ट से है यूरोप अगयरा के
08:25और जो और उपर के आपके साइबेरियन फॉरेस्ट हो गयरा है
08:30वो फिर भी बचे हुए है
08:34सबसे आदा काटे कहां जा रहे हैं
08:36ब्राजील में, अफ्रिका में, भारत में, मलेशिया, इंडोनेशिया में
08:52जो अमीर हुआ है यूँ ही अमीर थोड़ी हुआ है
08:54वो अमीर इसलिए तो हुआ है ना कि अपनी मौज करेगा, मरजी चलाएगा, दूसरे को भोगेगा
08:58जैसे एक अमीर आदमी दूसरे गरीब के उपर चड़के बैठता है, वैसी एक अमीर देश भी तो गरीब देशों पर चड़के बैठेगा, ना
09:05क्या समधान है इसका, जब तक हम इंसान को ही नहीं बदलेंगे, हम देश को कैसे बदल सकते हैं, हम बदल सकते हैं
09:15हम इंसान को नहीं बदलेंगे
09:18तो policies बदलने वाली है क्या
09:19कौन बदलेगा policies
09:21विदान्त पुछता है न
09:23करता कौन है
09:24doer कौन है
09:26doer को बदले बिना डीट बदल सकती है
09:28तो आपके साथ
09:33आपकी संस्था इसी doer को
09:36actor को, करता को
09:37बदलने का प्रयास
09:40कर रही है
09:40पर ऐसा लगता नहीं कि हमारी
09:44गति परयाप्त है
09:45जिस पैमाने पर
09:48ये काम होना चाहिए उससे बहुत छोटे
09:50पैमाने पर हो रहा है और समय
09:51ये 39 पर कैसे रुख गया
09:54अभी ही है, 30 पहुँच गया है लगबग
09:55अच्छा 2015 है
09:57ये ऐसे गिर रहा है
10:01अब जो
10:10पॉपुलेशन बढ़ी
10:14फॉरेस्ट घटा
10:16एक आपको आगणा दू
10:22कमजोर दिल आले ना सुने
10:24ये जिन्हों ने ज़्यादा खावा लिया वो ना सुने
10:29उलट दोगे
10:31पिछले 50 सालों में ही
10:35कुल मिला करके
10:37जितनी हमारी वाइल्ड पॉपुलेशन थी जंगलों के भीतर
10:41हम उसका 75 पतिशत समाप्त कर चुके है
10:44मतलब दुनिया भर के जंगलों में कुल मिला करके
10:49अगर 40 पशुपक्छी हुआ करते थे
10:53तो सिर्फ 50 साल के अंदर हमने उसको 10 कर दिया है
10:5575 पतिशत साफ कर दिये
10:59ये हैं थल्चर जो रहते हैं
11:07जमीन पर
11:09और जब उनकी बात करो जो रहते हैं
11:12पानी के नीचे 85 पतिशत साफ कर दिये
11:15कोई नहीं बचरा इस प्रत्वी पर हमारे अलावा
11:20हम किसी को भी नहीं छोड़ रहे हैं
11:24एकदम ही नहीं कोई बचरा
11:25सूचिए ना 85% population decline
11:28मनुष्य की तादाद बढ़ती जा रही है
11:30और दूसरों को पिछले 50 साल के अंदर
11:32हमने 85 प्रतिशत खत्म कर दिया
11:35उएक दम ही नहीं बचे
11:43और कहां बचेंगे
11:46यहीं तो रहते थे वो
11:46तो यह रहते हैं कैसे बचेंगे
11:53इı जी इटा इस वक्त इसलिए नहीं है
11:54कि आपको स्वर्ग पहुचा देगी
11:56इसलिए है कि उज शायद प्रत्वी बचा देगी
11:59देगी, स्वर्ण को गेरा छोड़ दो, अभी तो प्रत्वी पच जाए, यही बहुत बड़ी बात है
12:05कैसे रुखेगा, समधान क्या है
12:12आम आदमी ही समधान है
12:15क्योंकि दुनिया में जो देश सबसे ज़्यादा एमिशन कर रहे है
12:21वो सब डेमोक्राटिक है
12:23जी ट्वेंटी आप जानते हैं न, जी ट्वेंटी, वो दुनिया के 80 से 90 प्रतिशत कारबन एमिशन का जिम्मेदार है
12:31और जी ट्वेंटी पूरा डेमोक्राटिक है
12:34मैं क्या कहना चाहता हूँ, बात किसके हाथ में है, बात आपके हाथ में है
12:43लेकिन आपको बेवकूफ बनाया जा रहा है, आपको ऐसे मुद्दों में उल जाया जा रहा है
12:47जो बिलकुल नकली है ताकि आप ये बात न करो
12:50जो दुनिया के 6 देश हैं, जो सबसे आदा एमिशन करते हैं
12:59US, China, भारत, Russia, European Union, Brazil
13:10ये सबके सब या तो democratic हैं या कम से कम semi-democratic है
13:16ये कोई एक राजनीता नहीं कर रहा है, ये जनता कर रहा है, ये हम कर रहा है
13:29आचारे जी जैसे अब हम बुक स्टॉल्स और्गिनाइस करते हैं अपनी अपनी सिटीज में अब आपने इतना बड़ा ये इशू जो बताया है लेकिन जब ग्राउंड पर काम करते हैं तो पदा नहीं ये जो हमसे उपर की एक जेनरेशन है या हमारी भी ये थोड़ी अनवे
13:59कि अपना पूरा जोर कैसे लगा सकते हैं आप हमसे क्या एक्सपेट करते हैं कि आपने हमें ये बात बदा दी हम कैसे अपने आसपास इस बात को और जोर जोर से पहुंचा है मतलब रेट बढ़ा दें उसका बहुत ज़्यादा बात उम्र की भी इतनी नहीं होती है वरना
14:14होने को ये भी हो सकता है कोई 70 साल का हो ये मुद्दा बहुत सीधा है इसमें कोई बड़ी जटिलता नहीं है कि किसी ने इंजिनरिंग पढ़ी होगी या मैट्स पढ़ी होगी या साइंस पढ़ी होगी या क्लाइमेट साइंस पढ़ा होगा तो ही ये समझेगा इसमें ऐसा
14:44पांस साल मर जाओंगा तो मैं अपना कंजंप्शन कट करूं तो किसके लिए मालो मैं कह रहा हूं कि मैं आने आले पुष्टों के लिए रोक रहा हूं अपना कंजंप्शन तो मैं तो मर जाओंगा उनसे मुझे क्या मिलेगा
14:55मैंने उन्हें कुछ दे दिया
14:58बदले मुझे क्या मिला
14:59बात बस यह
15:01इतनी सी बात
15:04इंसान के भीतर जो यह भाव है
15:09कि मैं
15:11एक इंसान हूँ
15:14जो पैदा हुआ है भोगने के लिए
15:18जो दुनिया से अलग
15:22अपने हिट साथ सकता है
15:25दूसरों को बर्बाद करके खुशी पा सकता है
15:29जब तक इंसान के भीतर यह चीज रहेगी
15:31तब तक इसका मुकाबला करना बहुत मुश्किल है
15:33तो और किसी तरीके से हो सकता ना बिटो तो मैंने करा होता
15:38अभी तो मुझे थोड़ा सा जोड़ी अध्यात्म के लावा कोई तरीका नहीं है
15:42कोई तरीका नहीं है
15:44अब आप कोई तरीका मुश्किल लग रहा है तो क्या करें
15:47नहीं मुश्किल
15:48जो नौती मुश्किल है तो तरीके भी मुश्किल ही होंगे ना
15:51आसान तरीके होते तो सबसे पहले मैंने ले लिये होते
15:55हमें अभी सल्यूशन यही है कि जिनको यह बात थोड़ी समझ में आ रही है
15:59आपको यह बात बोलनी पड़ेगी डंके की चोट पर बोलनी पड़ेगी आप बोल नहीं रहे हो
16:07नहीं तो इसमें से काफी कुछ तो ऐसा है जो अलग-अलग मौकों पर मैं पहले भी बता चुका हूं
16:12और यह सारी publicly available information है आप खुद भी इसको ले करके क्या करना है
16:19प्रिंट आउट ही तो निकालने है ले करके कहीं पर लगा दो या बांट दो और क्या करना है
16:25आप book stall पर जाते हो मैं उस बात से भी समझ रहा हूँ और जो बोलने में तेवार है उससे भी समझ रहा हूँ कि साहस है
16:37और उसाहस हमारे यापी बहुत कम लोगों में है बहुत ज़ादा डरे होग है हमारे
16:42वो ऐसे ही है जैसा अभी है ना कि मैं इधर देखना हूँ और सब इधर देख रहे हैं एग साथ नहीं देख रहे हैं किसी दिशाबirmें
17:00अभी हम बहुत होश्यार लोग हैं ना हम अपने आपको हम अपने आपको बहुत स्मार्ट समझते हैं हम कहते हैं कि नहीं नहीं 50-50 करके चलने का रिस्क नहीं लेने का इधर भी बना के चलने का उधर भी नाराज नहीं करने का
17:16तो उसके साथ ज़्यादा कुछ हो नहीं सकता
17:23मैं विक्तिकत रूप से अपने आपको ये दिलासा दे लूँगा कि मैं अधिकतम जो कर सकता था मैंने करा
17:32जब इधर देखता हूँ तो मुझे ये भी पता होता है कि
17:36और किसी को सिर्फ तो आकड़े समझाने से भी नहीं होगा
17:46कि ये आकड़े भी जनको पता भी है वो भी कोई अपना चाल-चलन ढर्रा थोड़ी बदल रहे हैं
17:54जब तक इंसान का केंदर ही नहीं बदलोगे उसका सेंटर ही नहीं बदलोगे
17:58तब तक पहली बात तो वो ये आंकड़े जानना नहीं चाहेगा, और अगर जान भी गया तो कहेगा, so what?
18:05मुझे क्या फर्क पड़ता है? मौज करो.
18:11अभी आपका ये चल रहा है कारिक्रम, इसमें आप खुजी आपको संस्था से कितने लोग दिखाई दे रहे हैं?
18:17500 लोगों की संस्था है अभी, जिसमें से लगभग आधे लोग तो सिर्फ आपकी काउंसलिंग का काम करते हैं, उनमें से आपको यहाँ छे भी ना दिख रहे होंगे, देखिए कितने दिख रहे हैं, अपने-अपने काउंसलर खुजने कोशिश करी अगर मिल जाये तो,
18:37यह तो छोड़िये कि आप हमारे साथ हैं, आज 29 तारीक है, 29 तारीक को भी संस्था यह सेशन ने अटेंड कर सकती, वो सम मिल करके लगभग 40 पतिशत लोग हैं अभी भी, जो भागने को तैयार हैं, वो उनका पीछा कर रहे हैं, फोन कर रहे हैं कि एन्रोल्मेंट कर लो, ए
19:07नहीं है कि वो यहां आगे बैठ सके हैं, मैं संस्था कि लोगों की बात कर रहा हूँ, वो इस अगर भी फोन पर लगे हुए हैं, और उससे क्या हो जाएगा, 500 करोड लोगों का देश है, 800 करोड लोगों का विश्व है, यह मेरे 100-100 लोग, कितने लोगों से संपर्क साध ल
19:37और जिनको मेरे साथ होना चाहिए, वो साथ नहीं है, वो बोज है, वो चुनौती है, वो बहुत बड़ बोज है, हर महीने उनको ढोना पड़ता है, और बहुत श्रम जाता है संस्था का उनको साथ लेकर चलने में, एक ही तरीका है,
20:02जैसे आपने समझा वैसे ही कोई और समझ पाएगा, और अगर कोई वैसे ही समझेगा जैसे आपने समझा उसी माध्यम से, उसी जरिये से, तो आपको उसको वहाँ ही लाना पड़ेगा जहां आप खड़े हो, अब आप चाहो तो यह सोच लो कि मैं अपने सौरत के लिए बो
20:32जिता में लाना पड़ेगा, आप यह नहीं किया सकते कि आप गरहाक हो, और संस्था की दुकान है, आप आए आपने आथे चीज खरीद लिये और आप चले गए हो, नहीं, नहीं, नहीं, जो यह बात हो रही है, अगर समझ में आ रही है, तो जाओ और लोगों को लेकर के आ
21:02सौ डेड़ सौ लोग ही संस्था की आवाज हैं और हात पाओ हैं, तब तक काम में बहुत गती नहीं आ पाएगी, और इन सौ डेड़ सौ लोगों को भी बहुत विरोध जहलना पड़ता है, आप लोगों से ही, तो यह भी तूट तूट करके फिर बिखरते हैं, यह संख्या
21:32जितना मैं इस मुद्धे को समझा है, आपको मैं बहुत ऊपर-ऊपर की बाते बता रहा हूं।
22:00जितना एक घंटे में समझाया जा सकता है, पर इसमें गहराई में भी जाकरके, दुनिया में और जितने तरीके काम हो रहे हैं, उनको भी देखा है कि क्या पता, वहां पर कोई समधान संभव हो, कहीं कोई समधान नहीं है, एक स्टार्ट अप है अभी, वो कह रही है कि हम ड
22:30टेक्नलोजिकल सॉल्यूशन निकाल देंगे, कुछ कर देंगे, एक मातर समधान जो मुझे दिखाई दिया, जो काम करता है, कर रहा है और हमारे पास प्रूफ अफ कॉंसेप्ट है, मैं अगर उन लोगों को लूँ जो सच मुछ मेरे साथ जुड़े हुए हैं, तो उनका ज
23:00जो गीता में आता है, वो इस ग्रह के लिए, सभी प्रजातियों के लिए वर्दान बन जाता है, मैं जानता हूँ, और ये सिद्ध होता है, लगातार सिद्ध होता है, लेकिन वो संख्या बहुत छोटी है, सारी समस्या संख्या की आ रही है, the numbers, the numbers, the resources and the numbers, वहीं पर सबटक
23:30जानते हैं संस्था को, उन्हें ये बोलते हुए बिल्कुल भी जिजख नहीं होती, कि आपकी संस्था इस वक्त दुनिया का सबसे जरूरी काम कर रही है, और शायद हम अकेले हैं, जो उस काम को उस तरह से कर रहे हैं, कि सफलता मिल रही है, लेकिन ये जरूरी काम बहुत �
24:00मत करो भई संस्था के नाम पर, अपने नाम पर कर लो, पर करो
Be the first to comment
Add your comment

Recommended