00:00स्वाध्याय यानी स्वविचार और श्लोकों का नियमित अध्यायन ये अकेले ज्ञान नहीं देता, बलकि मन को परिश्कृत करता है।
00:08जब हम ग्रंथ पढ़ते हैं, तो हमें केवल तथे नहीं मिलते हैं।
00:12हमें अपने कर्मों का मुल्यांकन, आचरन की कसोटी और जीवन की गहन समझ मिलती हैं।
00:17मनन का अर्थ है पढ़े हुए विशय पर ठर कर विचार करना।
00:21इससे शाब्दिक ज्ञान अंतर ज्ञान में बदलता है।
00:24पर ये तवी संभव है जब स्वाध्याय नियमित और सचेत हो।
00:28रोज थोड़ी देर श्लोक पढ़ना, उनके अर्थ पर सोचना और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करना।
00:35इससे विचारों की स्पष्टता आती है, निर्ने सुधरते हैं और आत्म ज्ञान बढ़ता है।
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