00:00स्वागत है इस आत्म ज्यान और शांती की यात्रा पर
00:14आज हम भगवद गीता के छठे अध्याय ध्यान योग के गूड ज्यान को समझेंगे
00:20इस अध्याय में भगवान कृष्ण ध्यान मन को नियंत्रित करने और आत्म साक्षाकार के माध्यम से मोक्ष प्राप्ट करने की कला सिखाते हैं
00:31यह ज्यान न केवल अध्यात्मिक है बलकि हमारे दैनिक जीवन को भी शांती और संतुलन से भर देता है
00:39अध्याय की शुरुवात भगवान कृष्ण द्वारा आत्मनुशासन और आत्मनियंत्रन के महत्व को समझाने से होती है
01:01वे कहते हैं जो मनुष्य बिना आसत्ती के अपने कर्तवियों का पालन करता है वही सच्चा योगी है न कि वह जो केवल कर्म का त्याग करता है
01:13योगी वह है जो अपने कारियों से जुड़ा रहता है लेकिन उनके फल की कामना नहीं करता
01:19इसका मतलब है कि संतुलन बनाए रखना ही सच्चा योग है
01:24कल्पना करें एक मा अपने परिवार के लिए खाना बना रही है
01:30एक कलाकार अपने चित्र में तल्लीन है या एक वैज्यानिक खोज में मगन है
01:35जब ये कार्य बिना किसी लालचके किये जाते हैं तो वे योग का प्रतीक बन जाते हैं
01:43यही ध्यान योग की पहली शिक्षा है
01:46कृष्ण अर्जुन को ध्यान का अभ्यास सिखाते है
01:50मनुष्य को स्वयं के द्वारा अपना उद्धार करना चाहिए न कि स्वयं को नीचे गिराना चाहिए
01:58क्योंकि स्वयं ही अपना मित्र है और स्वयं ही अपना शत्रू
02:03इसका अर्थ है कि हमारा मन हमें उचाई तक ले जा सकता है या हमें नीचे गिरा सकता है
02:10मन को नियंत्रित करने के लिए ध्यान आवश्यक है
02:14अब कलपना करें कि आप एक शांत जगहे पर बैठें हैं
02:20आपकी पीठ सीधी है, आपकी आखें बंध हैं और आपका मन स्थिर है
02:26अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित करें
02:30यह सरल अभ्यास आपको वर्तमान क्षन से जोड़ता है
02:34क्रिश्न कहते हैं कि ध्यान में सफलता के लिए संतुलन जरूरी है
02:39जो बहुत अधिक खाता है या बहुत कम खाता है
02:44जो बहुत अधिक सोता है या बहुत कम सोता है
02:48वह योग में सफल नहीं हो सकता
02:50संतुलित जीवन शैली मन और शरीर को ध्यान के लिए तयार करती है
02:55धीरे धीरे भटकता मन स्थिर दीपक की लौकी तरह शान्त हो जाता है
03:01कृष्ण एक सच्चे योगी की द्रिष्टी के बारे में बताते है
03:06जो सुख और दुख में समान रहता है
03:10जो साधु, गाय, हाथी, कुत्ते और चांडाल को समान रिष्टी से देखता है
03:15वही सच्चा योगी है
03:17इससे पता चलता है कि योगी हर प्राणी में समानता देखता है
03:22योगी द्वंद्वों से परे हो जाता है
03:26सुख़दुख, सफलता-सफलता और हर प्राणी को समान दृष्टी से देखता है
03:31आज की दुनिया में जहां भेदभाव बढ़ता जा रहा है
03:36यह संदेश हमें मानवता के प्रती करुना और समानता सिखाता है
03:40कृष्ण ध्यान के लाभों का वर्णन करते है
03:45जब मन सभी इच्छाओं से मुक्त होकर स्थिर हो जाता है
03:50तब योगी आत्मा के आनंद का अनुभव करता है
03:53यहां आनंद किसी बाहरी चीज़ पर निर्भर नहीं है
03:58बलकि आत्मा से जुड़ने का सुख है
04:01कृष्ण अर्जुन को आश्वस्ट करते हैं
04:05योग में किया गया कोई भी प्रयास व्यर्थ नहीं जाता
04:09यहां तक की थोड़ी प्रक्ती भी बड़े भय से मुक्ती दिलाती है
04:13यहां हमें प्रेरित करता है कि हर छोटा कदम हमें हमारे उच्चतम लक्षे के करीब ले जाता है
04:21अध्याय के अंत में तृष्ण कहते हैं
04:26सभी योगियों में जो प्रेम और श्रधा से मेरी भक्ती करता है वही सबसे श्रिष्ट है
04:32यहां भक्ती की शक्ती पर जोर दिया गया है
04:36जो व्यक्ती प्रेम और समर्पन के साथ इश्वर से जुड़ता है
04:42वह सभी मार्गों से उपर उठकर मोक्ष प्राप्त करता है
04:46ध्यान योग हमें संतुलन, करुणा और शांती का मार्ग दिखाता है
04:51प्रति दिन कुछ मिंटों का ध्यान शुरू करें
04:55और देखें कि कैसे भगवत गीता का ज्यान आपके जीवन को बदल देता है
05:00इस वीडियो को देखने के लिए धनियवाद
05:04यदि आपको यह वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक, शेर और स्टार बेजना न भूले
05:10अगली बार तक शांती और प्रेना के साथ रहें
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