00:00हरिद्वार के पास एक छोटा सा गाव है, जहां एक मंदिर के पीछे एक साधू बैठा रहता था।
00:06आखे पीली, शरीर पर राख और जुबान पर चुपी, लोग उसे प्रणाम करते, पर वो कभी प्रतिक्रिया नहीं देता।
00:15एक बार एक लड़के ने मजाग में पूछा, बाबा मुझे भी सिध्धी दे दो। साधू ने उसकी ओर देखा और बस मुस्कुरा दिया।
00:24उसी राज से उस लड़के को सपनों में वही साधू दिखने लगा।
00:28खून से सनी माला पहने, आखों से पीली रोशनी निकलती। और वो कहता, अब तेरी बारी है।
00:35आखरी बार वो लड़का अपने घर की छट पर चढ़ा देखा गया। और सुबह, वहाँ सिर्फ उसकी जली हुई चपले मिली।
00:43कहते हैं, वो साधू अब भी बैठा है, और अगला मजाग धून रहा है।
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