00:00उत्राखन के एक पहाडी रास्ते पर एक चाई की दुकान है, जो सिर्फ आधी रात को खुलती है।
00:06एक चौनती साल का यात्री बस चूग गया और वहां रुका।
00:10दुकानदार ने उसे चाई दी। चाई का स्वाद अजीब था।
00:15उसने पूछा, चीनी कहा सिलाते हो। दुकानदार मुस्कुराया, ये चीनी नहीं, हड़ी का चूरा है।
00:23यात्री के हाद से कब गिर गया। तभी उसने देखा, पास ही बैठे ग्रहक सब बिना चहरों वाले थे। बस खोपड़ी जलक रही थी।
00:33सुबह लोग आये, तो वहाँ सिर्फ टूटी मेज और राक बची थी। यात्री कभी नहीं मिला।
Comments