00:00हम सब पांच तत्वों से बने हैं प्रित्वी, जल, अगनी, वायू और आकाश।
00:06ये सिर्फ प्रकृती नहीं, हमारे जीवन के पांच स्तम्ध हैं।
00:12जब कोई क्रोध करता है, अगनी बढ़ जाती है।
00:16जब दुखी होता है, जल भारी हो जाता है।
00:20योग और ध्यान हमें इन तत्वों को संतुलित करना सिखाते हैं।
00:25यही कारण है कि संत हमेशा कहते थे।
00:29जो स्वयं को संतुलित कर ले, वही संसार को समझ सकता है।
00:34क्योंकि पंच तत्वों में ही परमात्मा छिपे हैं।
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