00:00रात के ठीक तीन बजे, पूजा, 24 वर्षिय भारतिय युफती, अपने कमरे में अकेली थी.
00:07उसके फोन के घंटी अचानक बज उठी, स्क्रीन पर प्राइवेट नंबर लिखा था.
00:13पूजा ने डरते डरते कॉल उठाया, लेकिन दूसरी तरफ से सिर्फ धीमी भारी सांसे सुनाई दी.
00:20उसने पूछा, कौन है? लेकिन कोई जवाब नहीं. फिर अचानक फुस-फुसा हटाई, मैं तेरे कमरे में हूँ.
00:28पूजा का दिल धक-धक करने लगा. उसने फोन गिरा दिया, और कमरे में चारों ओर देखा. लेकिन कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.
00:38तभी उसने महसूस किया कि कमरे का दर्वाजा धीरे-धीरे अपने आप खुल रहा है. शरीर सिहर उठा. उसकी नजर खिड़की की तरफ गई. वहाँ कोई परचाई खड़ी थी, जो उसके हर मूव्मेंट को टकट की लगाय देख रही थी.
00:54पूजा चीखने लगी, लेकिन आवाज रुक गई. कहीं कोई सुनने वाला नहीं था. सिर्फ अंधेरा और उसका डर.
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