00:00गजाननम भूत गणादि सेवितम कपित जम्वूफल चारुभक्षणम उमाशुतम शोकिविनाशकारिकम नमामी भिगेनेश्वर पादपंकजम
00:09प्यारे मित्रों जैश्याराम जैमातादी मित्रों आज आप से चर्चा करते हैं
00:14पंपाकुष एकादशी का पावन ब्रत दो अक्टूबर को मनाया जाएगा या तीन अक्टूबर को मनाया जाएगा इसी विसेपे करेंगे आप से चर्चा
00:24पंपाकुष एकादशी का जो पावन पर्व है यह पावन पर्व तीन अक्टूबर दो हजार पचीस को मनाया जाएगा
00:33चार अक्टूबर को ब्रत का पारैन किया जाएगा और इसके साथ ही एकादशी तिथी की अगर हम प्रारंब की बात करते हैं
00:41तो दो अक्टूबर दो हजार पचीस को शाम को साथ बच करके दस मिनट पर यह तिथी प्रारंब हो रही है और तीन अक्टूबर दो हजार पचीस को साम को छे बच करके 32 मिनट पर यह तिथी पूर्ण हो रही है
01:00तो ऐसे में एकादसी का जो पावन पर्व है यह पावन पर्व तीन अक्टूबर को मनाया जाएगा अब हम आपसे चर्चा करें पंपाकुस एकादसी का जो महत्त है तो पापों का नाश होता है इस व्रत को करने में इस व्रत को करने से समस्त प्रकार के पाप हमारे दूर हो �
01:30भी प्राप्ति होती है यह ब्रत आत्मशुद्धिक और आध्यात्मिक उन्नती का मार्गी भी प्रसस्त करता है व्रत करने से परिवार में शुक और शांती भी आती है पंपाकुष एकादशी की ब्रत कथा संच्छेप में सुनाएं तो प्राचीन काल में देवों और अशुर
02:00इस्त्री रूपनी सक्ति को वंदी बना लिया तब भगवान विश्टू ने बामन अवतार लिया और पंपाकुष एकादशी के दिन देवताओं की इस्त्रीयों की जो सक्ति स्वरूपना सक्ति थी उसको मुक्त कराया ब्रत के प्रभावशे देवता और असुरों का कल्या
02:30इसके साथ ही पंपाकुस एकाजसी का जो वरत विधी है तो प्राते का लुठना है इश्पनान करना है शंकल पनेना है और इसके साथ में भगवानी विष्टनू का पूजन करना है भगवानी विष्टनू की प्रतिमा के शामने आपको दीपक जलाना है तुलशी अरपित करन
03:00उपवास का पालन करना है इस दिन उपवास के समय में केबल आप फलाहार ही ग्रहन कर सकते हैं
03:09ब्राम्वनों को दान देने का महत्तो बताया गया है भोजन कराईएगा ब्राम्वनों को वस्त्र दीजिये ब्राम्वनों को धन का दान करियेगा ब्राम्वनों को
03:20तो हमने आपको शंच्छेप में एकादशी जो पंपाकुष एकादशी है जो समस्त प्रकार के पापों का हरन करने वाली एकादशी है उस वरत के विशय में बताया अधिक जानकारी चाहते हैं या किसी भी तरह का कोई पूजापाट गेनुष्ठान से रिलेटिब जानकारी �
03:50करता को किसी में ये कि विजय करता है।
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