00:05राजस्तान के सीकर जिले में इस्थित खाटुशाम मंदिर में इस समय भक्तों की भारी भीड है
00:11यहां फालगुन महीने में लगने वाला प्रसिद लखी मेला चल रहा है और निशान यात्रा निकाली जा रही है
00:18खाटुशाम बाबा को चड़ाय जाने वाले इस निशान का बड़ा महत्व है जिसे हाथ में लेकर भक्त कई किलोमेटर तक
00:26पैदल जलते हैं
00:28यह निशान यात्रा राजस्तान के रिंगत से शुरू होकर बाबा खाटुशाम के धाम तक जाती है जिसकी दूरी करीब 17
00:35से 18 किलोमेटर है
00:36यह पैदल यात्रा होती है और फालगुन मास में लखी मेले के दौरान निकाली जाती है
00:42साल 2026 में लखी मेला 21 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक है
00:48चलिए बताते हैं आपको इस वीडियो में कि किस चीश का प्रतीक है वो निशान जिसे हाथ में लेकर खाटुशाम
00:54के भक्त कई किलोमेटर तक पैदल जलते हैं
00:56आखिर इसका क्या महत्व है और ये यात्रह क्यों की जाती है
01:00दर्सल्ट खाटुशाम बाबा को जो ये निशान चड़ाय जाता है
01:04ये जंडा होता है ये जंडा ये निशान बाबा खाटुशाम दोर दिये गए बलिदान का प्रतीक है
01:10जो नोने महाभारत के समय भगवान श्री कृष्ण को अपना शीष काट कर दान कर दिया था
01:15धन की जीत के लिए बाबा खाटू शाम ने ये बलीदान दिया था
01:20जिससे प्रसन होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें कल्यूग में पूजा जाने वाला वर्दान दिया था
01:26अक्तूस बलीदान की याद में ही केसरिया, नारंगी और लाल रंका ध्वज लेकर पैदल यात्रा करते हैं
01:32इस ध्वज में भगवान कृष्ण और श्याम बाबा के चित्र और मंत्र अंकित होते हैं
01:37साथी नारियल और मोरपंग भी बने होते हैं
01:40मानता है कि बाबा खाटो शाम के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं जाता
01:44इसलिए पूरे साल बाबा के दरबार में भगतों की लाइन लगी रहती है
01:49जो मनते मांगने के लिए खाटो शाम जी के सामने हाजरी लगाते हैं
01:53और फिर मनत पूरी होने पर दर्बार में निशान चढ़ाने आते हैं इन में से कई भक्त निशान लेकर पैदल
02:00यात्रा में चलते हैं
02:01माना जाता है कि खाटो शाम बाबा को निशान चढ़ाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है
02:06पूरी पैदल यात्रा के दोरान भक्त इस निशान को हाथ में ही पकड़े रहते हैं निशान को नीचे नहीं रखा
02:14जाता नाहीं इस यात्रा में शामिल होने वाले भक्त जूते चपल पहनते हैं ये यात्रा नंगे पाउं की चाती है
02:21अब लोग कपड़े के ध्वज के अलाव
02:34सब्सक्राइब लोग करदो में रखाएब में हुटी
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