00:00रात के बारव बजे मीरा अपने घर की छट पर खड़ी थी, नीचे गली खाली थी, तभी उसने देखा एक साया छट के कोने से नीचे छलांग लगाता हुआ गिर रहा है, लेकिन जब मीरा जोर से चीक कर देखी, वो साया हवा में ही थेह कर हिल रहा था, और उसकी आखें ख�
00:30जैसे ही मीरा पीछे मुड़ी, साया धीरे धीरे उसके पास आया, छट की लोहे की रेलिंग खुद ही हिलने लगी, और ठंडी हवा उसके चहरे पर तेजी से लगी, मीरा ने कदम पीछे खींचे, लेकिन पैर जैसे जड़ हो गए हो, और उसके कानों में अब भी वही हसी ग
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