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  • 4 months ago
कर्नाटक में मंगलुरू के मालेमर में साधारण कबाड़ की दुकान दिखने वाली ये जगह दरअसल अतीत की समृद्ध कलाकृतियों का घर है. ये हैं, कुलूर के कबाड़ व्यापारी इब्राहिम कलील. इन्होंने अपनी दुकान को बेकार सामानों के संग्रहालय में बदल दिया है. ये छात्रों को अध्ययन के लिए मुफ्त साधन भी उपलब्ध कराते हैं. कबाड़ की दुकान में विजिटर्स की भरमार रहती है. उन्हें दुर्लभ प्राचीन सिक्के, टेप रिकॉर्डर, टेलीफोन, लालटेन और पुरानी किताबें खींचती हैं. ये संग्रह सभी उम्र के लोगों को आकर्षित करता है. इब्राहिम की कोशिश इस बात का सबूत है कि जुनून और रचनात्मकता बेकार कहलाने वाले सामानों को भी खजाने में बदल सकती है. ये युवा पीढ़ी के लिए अतीत से जुड़ने का अनूठा माध्यम है.

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00:00करनाटक में मंगलूरू के मालेमर में साधारन कबार की दुकान दिखने वाली ये जगह दरसल अतीद की समरिध कलाकृतियों का घर है
00:10ये हैं कुलूर के कबार व्यापारी इबराहिम कली इन्होंने अपनी दुकान को बेकार सामानों के संग्रहाले में बदल दिया है
00:18ये चात्रों को अधियन के लिए मुख्य साधन भी उपलब्त कराते हैं
00:48कबार की दुकान में आगंतुकों की भरमार रहती है
01:08उन्हें दुरलफ प्राचीन सिक्के, टेप रिकॉर्डर, टेलीफोन, लाल्टेन और पुरानी किताबें खीचती है
01:15ये संग्रा सभी उम्रके लोगों को आकरशित करता है
01:19इब्राहिम की कोशिश इस बात का सबूत है
01:47कि जुनोन और रचनात्मक्ता बेकार कहलाने वाले सावानों को भी खजाने में बदल सकती है
01:53ये युवा पिढ़ी के लिए अतीच से जुड़ने का अनूठा माध्यम है
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