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  • 8 months ago
केरल के एर्नाकुलम जिले के एक सरकारी स्कूल से पढ़ी 19 साल की धराक्षा परवीन अब किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि केरल की छठी क्लास की किताब में 'श्रम और भाषा का स्वाद' नाम से उनकी कहानी को शामिल किया गया है. जिसमें बिहार में उनके जीवन की व्यक्तिगत यादें और केरल आने के बाद आए बदलाव को बताया गया है. बिना रुके और बिना हिचकिचाए फर्राटेदार मलयालम बोलने वाली ये लड़की मूल रूप से बिहार के दरभंगा की रहने वाली है, लेकिन वो खुद को मलयाली मानती है. धराक्षा परवीन ने कहा कि केरल के मुख्यमंत्री ने मुझसे कहा कि वो चाहते हैं कि मैं जो जीवन में करना चाहती हूं, उसे पूरा करूं. मैं उनके शब्दों को कभी नहीं भूल सकती, क्योंकि किसी ने मुझसे ऐसा कभी नहीं कहा. धराक्षा परवीन गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं. वो बताती है कि केरल पहुंचने के बाद उनके परिवार का जीवन कैसे बदला और उनके इस बदलाव में एक खास शिक्षा कार्यक्रम 'रोशनी' ने क्या भूमिका निभाई.

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00:00તોયલ ઇંડે રુજી બાશી ઉડેયું
00:03બિના રુકે ઔર બિના હજકે ચાએ
00:18ફરાટેદાર મલ્ય લાલી બૂરજીત બેહારકે
00:22દરબंગા કી રહ્યંં પરજીત
00:26When I come...
00:30It's about time for all times to work in the family like this.
00:36
00:56Thank you very much.
01:26Thank you very much.
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02:26Thank you very much.
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