केरल के एर्नाकुलम जिले के एक सरकारी स्कूल से पढ़ी 19 साल की धराक्षा परवीन अब किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि केरल की छठी क्लास की किताब में 'श्रम और भाषा का स्वाद' नाम से उनकी कहानी को शामिल किया गया है. जिसमें बिहार में उनके जीवन की व्यक्तिगत यादें और केरल आने के बाद आए बदलाव को बताया गया है. बिना रुके और बिना हिचकिचाए फर्राटेदार मलयालम बोलने वाली ये लड़की मूल रूप से बिहार के दरभंगा की रहने वाली है, लेकिन वो खुद को मलयाली मानती है. धराक्षा परवीन ने कहा कि केरल के मुख्यमंत्री ने मुझसे कहा कि वो चाहते हैं कि मैं जो जीवन में करना चाहती हूं, उसे पूरा करूं. मैं उनके शब्दों को कभी नहीं भूल सकती, क्योंकि किसी ने मुझसे ऐसा कभी नहीं कहा. धराक्षा परवीन गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं. वो बताती है कि केरल पहुंचने के बाद उनके परिवार का जीवन कैसे बदला और उनके इस बदलाव में एक खास शिक्षा कार्यक्रम 'रोशनी' ने क्या भूमिका निभाई.
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