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  • 2 months ago
कैक्टस यानी नागफनी के पौधे को बेकार समझा जाता है. कांटों की वजह से उसे जानवर भी नहीं खाते, लेकिन अब कैक्टस लोगों की कमाई का जरिया बन रहा है. राजस्थान के जोधपुर में इसकी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान यानी काजरी किसानों को बिना कांटों वाला कैक्टस मुहैया करा रहा है..  कैक्टस का जूस स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है. इसकी वजह से बाजार में उसकी डिमांड है. किसान इसके फलों का जूस निकालकर बेच सकते हैं. कैक्टस से बनी विगन-लैदर से जैकेट, बेल्ट, पर्स जैसी चीजें बनाई जा सकती हैं. कैक्टस से बायो-फर्टिलाइजर तैयार किया जा सकता है. इससे बायो-फ्यूल भी बनाया जा सकता है. कई कारोबारी किसानों से कैक्टस खरीदकर उसका प्रोसेसिंग कर बाजार में बेच रहे हैं..  काजरी के वैज्ञानिकों ने मोरक्को से आई कैक्टस की कई प्रजातियों पर अध्ययन किया. उनमें बिना कांटे वाली प्रजाति को पशुओं के चारे के लिए उपयोगी पाया. बिना कांटों वाले कैक्टस का एक तना दस रुपए में मिलता है. एक हैक्टयर में करीब दस हजार पौधे लगते हैं. एक बार लगाने के बाद इसका उत्पादन हर दो माह में लिया जाता हैं. कम पानी वाले स्थानों में कैक्टस की खेती किसानों के लिए आमदनी का अच्छा जरिया साबित हो सकता है. 

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00:00cactus
00:30हम किसानों को हमारा काजरी का जो मेंडेट है उसके अनुसार हम उत्वादन तक्निकी बताते हैं कि इसका बेस्ट उपयोग या उत्वादन कैसे बढ़ा सकते हैं
00:39कैक्टिस का जूस स्वास्त के लिए बहतर माना जाता है इस वजह से बाजार में उसकी डिमांड है किसान इसके फ़लों का जूस निकाल कर बेच सकते हैं कैक्टिस से बनी विगन लैदर जैकेट बेल्ट पर्स जैसी चीज़े बनाई जा सकती हैं कैक्टिस से बायो फर्टिला
01:09So, we have a clinical trial, our product is called HB Plus, PricklyPairIndia.com, we have a process patent, we have a process patent, we have a color, sugar, fragrance and fragrance.
01:28Kاضry के वैज्ञानिकों ने मुरख्कों से आये कैक्टिस की कई प्रजातियों का अध्यन किया। उसमें बिना काटे वाली प्रजाती को पश्वो के चारे के लिए उपियोगी पाया है। बिना काटोवाले कैक्टिस का एक तना 10 रुपए में मिलता है।
01:43एक हैक्टियर में करीब 10,000 पौधे लगते हैं, कम पानी वाले स्थान में कैक्टिस की खेती किसानों के लिए आमदनी का अच्छा जरिया साबित हो सकता है
01:53इच विभारत के लिए उदेपूर से कपिल पारेक की रिपोर्ट
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