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  • 5 months ago
Transcript
00:00Aọ me Rehimu nāma ka aike gariib kisān raha ta tha.
00:04Vah din bhar kaari mehant ka ra ta,
00:07laekin muskil se 2 vakt ka khana juta paata tha.
00:11Eik din Trahimu ne murgi ke ghosle me haath đala,
00:14to usi kuch chamkila sa laga jho aam annde jaisa nahi tha.
00:18Dekhkar uska mung khula ka khula raha ga.
00:22Murgi nne eek chamakdaar sunhaara annda diya tha.
00:25Kho khushi se uchhal pa dha.
00:27उसने वह अंडा बाजार में बेच दिया और अच्छी कमाई की अगले दिन भी वही चमतकार हुआ
00:33रोज एक सुनहरा अंडा देने लगी
00:36जल्द ही रहीमू अमीर हो गया
00:39उसे रोज एक अंडे की रफतार धीमी लगने लगी
00:43उसने सोचा अगर यह मूर्गी रोज एक के बजाए दस अंडे दे
00:48तो मैं और भी जल्दी अमीर बन सकता हूँ
00:51हो सकता है इसके पेट में सोने का खजाना हो
00:55उसके दोस्तों ने उसकी मूर्खता समझाने की कोशिश की
00:59लेकिन लालच ने उसकी बुद्धी को अंधा कर दिया था
01:03एक दिन क्रोध और लोग के आवेश में उसने चाकू उठाया और मुर्गी का पेट चीर दिया
01:11लेकिन अफसोस
01:13मुर्गी के पेट में न तो कोई खजाना था और नहीं सोने के अंडे
01:18वह तो बस एक साधारण मुर्गी थी
01:21अब रहीमु के पास न तो वह खास मुर्गी थी और नहीं रोज सोने के अंडे पाने का कोई जरिया
01:29उसे अपनी लापरवाही और अधीर्ता पर पच्तावा हुआ और वह अपनी पुरानी गरीबी भरी जिन्दगी में लोट गया
01:37सीख यह कहानी हमें सिखाती है कि लोब और अधीर्ता इंसान को उसके द्वारा प्राप्ट आशिरवाद से भी वंचित कर देती है
01:47संतोश और जो उपलब्ध है उसकी कदर करना ही सच्ची खुशी की कुंजी है
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