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AK-47, जिसे Kalashnikov भी कहा जाता है, दुनिया की सबसे खतरनाक और लोकप्रिय राइफल है। लेकिन आखिर यह राइफल इतनी खास क्यों है? क्यों सैनिकों से लेकर आतंकियों तक हर किसी की पहली पसंद बनी हुई है? जानिए ये राज Siddharth Purohit के साथ आपको इस Show Parakram में।

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~HT.178~ED.108~GR.124~

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00:00अगर आपने KGF फिल्म देखी है तो वो सीन आप भूल नहीं पाए होंगे जब रोकी का एक साथ ही जोर से चिल लाता है कलाश निकोव और बहुत सारी AK-47 राइफल्स ट्रक में से निकलती हैं और संजदत की गैंग पर गोलियां बरसाने लगती है इसके अलावा अमेरिका मे
00:30और कैसे यह दुनिया में सबसे जादा जान लेने वाली राइफल बन गई सवाल यह भी दिमाग में आता है क्यों इतने साल बाद भी यह आतंक और ताकत का पर्याय बनी हुई
00:42सब बताएंगे आपको इस सेग्मेंट में नमस्कार मैं हूँ सिधार और आप देख रहे हैं वन इंडिया का डिफेंस शोव पर आकर जिसमें हम आपको बताते हैं आधुनिक हत्यारों, दुनिया में चल रही लड़ाईयों और डिफेंस टेक्नोलोजी के बारे में
00:56कहानी शुरू होती है सोवियत संग के एक नौजवान टैंक सिपाही मिखाईल कलाशनिकोव से, 1940 के दशक में युद के दौरान मिखाईल कलाशनिकोव खायल हो गया
01:14कहा जाता है कि उनकी राइफल अटकने की वज़े से ऐसा हुआ था, लेहाजा मिखाईल ने सोचा कि एक ऐसी राइफल क्यों न बनाई जाए, जो सिपाहियों के हातों में हो तो भरो सा पैदा पिरे, जिसको चलाना आसान हो और देख भाल भी कम ही लगा
01:301947 में उनकी टीम ने एक जजाइन पेश किया, आटमेटिक कलाश निकोवा, यानि की एके 47 का, दो साल पर इस पर काम किया गया, कई बार असफलता भी मिली और तब जाकर बनी एके 47
01:4418 जून 1949 को इसे सोवियत सेना ने आपचारिक रूप से ऑपरेशन में लाया, यह मेकिंग किसी वरक्शॉप, मैनुवल की तरह पुर्जा दर पुर्जा नहीं, बलकि जरूरत, अनुबाव, असफलता और साधारण एंजिनियरिंग का एक नतीजा थी
02:00एके 47 की खूबियों ने ही इसे पॉपुलर करवाया, दरसल यह है गैस ऑपरेटेड रैफल थी जिसमें लॉंग स्टॉक पिस्टन सिस्टम था, जो की कमपार्ट्स की मदद से बनाया गया था, इसकी टॉलरेंस इतनी हाई थी कि धूल की चड़ बारिश कुछ भी हो यह अ�
02:30देता था, वहीं एके 47 के वारे में कहा जाता है कि इसे 10 साल भी जमीन में गाड़ कर रखा जाए, फिर भी निकाल कर चलाओ, तब भी है वैसी की वैसी चलेगी, दावा कितना सही है, कोई फौजी भाई यह वीडियो देख रहा हो, तो कमेंट में बता सकता है, खेर, एके 47 क
03:00कि इसकी यूजर फ्रेंडलीनेस ने इसे पेशेवर सेनाओं से लेकर आतंकवादियों तक हर हाथ में जगह दिलाए, कुल्ड वार के दशकों में सुवियत संग और बाद में चीन ने से राइफल को अपने मित्र देशों और आजादी की लड़ाई लड़ने वाले करांतिक
03:30सेंसिंग और कई जगह अवैद कॉपी जैसे की खैवर प्रक्तून ख्वा में बनने वाली खैवर पास कॉपी ने इसकी संख्या को फोटक दंग से बढ़ा अनुवान है कि दुनिया में कुल सक्तर से सौ मिलियन तक कलाश्निकोव या फिर एक सीरीज की राइफल हैं मौज�
04:00में भी काम कर सकती हैं दूसरा कम खर्ची ली है यानि उत्पादन सस्ता होसता है पार्ट भी सिंपल रहते हैं तीसरा आसान ट्रेनिंग यानि शुरुवाती यूजर भी तेजी से सीख सकते हैं चौथा उपलब्दता मसलन कोल्ड वॉर सप्लाइब और बाद में अवयत बा
04:30आपके हाथों में लोग प्रिया बना दिया और यह पॉप कल्चर का भी आइकन बन गी कितनों की जान ली यहां आकर इतिहास एक नैतिक प्रश्ण बन जाता है
04:39एके 47 से कितनी मौते हुई साफ साफ संख्या कोई नहीं बता सकता क्योंकि हर जंग में कई हतिहारों की भूमिका होती है
04:47लेहाजा रिकॉर्ड पुखता नहीं हो पाता लेकिन वेश्वे के स्तर पर स्माल आम्स यानि की हलके हतियार से होने वाली मौतों का अनुमान साल आना कई लाख तक जाता है
04:57मानवी अधिकार संगठनों ने लंबे समय से चेताया है कि हर साल लगभग पांच लाख लोगों की जान हलके हतियारों के चलते चली जाती है
05:06फिर भी एक अंदाजे की मताबिक एक एक फॉर्टी सेवन दस लाख से ज्यादा जाने अब तक ले चुकी है लेकिन इस सिर्फ अनुमान मात्रे
05:13एक फॉर्टी सेवन के वल एक राइफल नहीं वलकि सिंबल भी बनी ताकत का क्रांती का प्रतिरोध का और कई जवहों पर अपराद का इसकी काला बाजारी ने इसे और आसान बना दिया कहीं इसकी कीमत लाखों में है तो कहीं एक मुर्गे के बदले भी मिल जाती है
05:29गरीबी ज्यादा हुई तो चाकू घॉप कर चीनी भी जा सकती है इसकी बची कुछ भी ब्राइंडिंग फिल्मों गेम्स पोस्टरों यहां तक की राजनीतिक आईकन ग्राफी तक सब भी ने कर इसके कई अपग्रेड वर्जिन है जैसे कि एक एम हलकी स्टेंबल रिसीवर
05:59लाया था और यह भी सफल लागा कुल मिलाकर यह महफिल लूट लेने वाली राइफल रही जिसने कई महफिलें लूटी कई उजाणी बावजूद इसके आज भी शान का प्रतीक है हमारा यह सेग्मेंट आपको कैसा लगा हमें कॉमेंट में जरूर बताया साधी बताएं कि
06:29झाल
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