00:00इस्लामिक अर्दु मेवाद के मुआजिज नाजरीन
00:04अस्सलामु आलीकूम
00:06बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम
00:10तहजद ऐसा मरहम है
00:13जिसके पास हर चोट का इलाज मुजूद है
00:18बस तुम्हें यकीन रखना है
00:21फिर वो जखम भी भर जाएंगे
00:24जो तुम्हें लगता है
00:26कि अब ये कभी भी नहीं भर सकते
00:30और वो किस्से भी मुकमल हो जाएंगे
00:33जो तुम्हें लगता है
00:36कि उन्हें कोई मुकमल नहीं कर सकता
00:40और ये मत भूलो
00:43कि तुम्हारा रभ वो सब कुछ कर सकता है
00:47वो हर चीज़ पर कादिर है
00:50तहजजद की खामोशी में बेहने वाले तुम्हारे आंसूं अल्ला को राजी कर लेते हैं
00:59नमाज तहजद अल्ला ताला का पुर्ब हासिल करने
01:05और अल्ला ताला से राज वु नियाज की बाते करने का बहतरीन वक्त होता है
01:14अल्ला पाग को इनसान का नीन से बेदार होकर उसके सामने सजदाहरेज होना
01:25और आंसूं के मोतियों से इलतिजा करके अपनी दुआएं तलब करना बहुत पसंद है
01:35यही वो वक्त होता है जब इनसान को नवाज दिया जाता है
01:42तहजद की दुआओं के लिए तो साथ आसमानों के परदे उठा दिये जाते हैं
01:51तो फिर अल्ला ऐसे मौजिसे करता है जो ना कभी जमीन वालों ने देखे होते हैं
01:58ना आसमानों वालों ने अल्ला से हमेशा भलाई और अच्छे वक्त की आस रखनी चाहिए
02:08वो अपने बंदों को उसी चीज से नवाजता है जो वो अल्ला से तवक्व करते हैं
02:17अल्ला के खजानों में सबसे कीमती चीज राहे हिदायता है
02:23दिलों से गम मिटाता है मुहम्मन सल्ला लाहु आलिही वसलम नाम ही ऐसा है
02:32तहाजुद तो मुहब्बत का खास तुफ़ा होती है
02:37इतना खास के अल्ला अपने बंदे से उस परदे में मुलाकात करता है
02:46जहां कोई तीसरी जात मुझूद नहीं होती
02:50तहजुद बहुत ताकतवर अबादत है
02:54क्यूंके ये गुनाह ये सवाब के खौफ से आरी है
03:00तहजुद तक इनसान तब पहुँचता है
03:05जब सारी हस्रतें दिल का साथ छोड़ देती है
03:10फिर इनसान ये नहीं सोचता इतना सवाब मिलेगा
03:16या इतना गुनाह मिलेगा
03:19तब बस इनसान ये सोचता है
03:22के अल्लाह मिलेगा
03:24या अल्लाह से मुलाकात होगी
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03:35शुक्रिया
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