00:00इस्लामिक अर्दु मेवाद के मुआजिज नाजिरीन
00:04अस्सलाम वालीकूम
00:06बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम
00:09आवाज इनसान को दूसरों से मुटालिक करती है
00:15और खामोशी इनसान को अपने आप से तारुफ करती है
00:21आजाब और अबरत के अलफाद सुनने में भी सक्त है और समझने में भी
00:30जो करता है अल्लाह करता है और अल्लाह जो करता है सही करता है
00:38अबादत इनसान को वहां नहीं पहुँचा दी जहां गम पहुँचा देता है
00:45आजाब की इन्तिहाई सूरत यह है
00:48कि अजाब नाजिल हो रहा हो
00:51और लोग बदमस्तियों
00:54और रंग-रंगोलियों में मारूफ हो
00:57महंगाई हद से ज्यादा
01:00और खरीददारी भी हद से ज्यादा
01:04आजब आलम है
01:05गम छोटे आदमी को तोड़ देता है
01:09बड़े आदमी को और बड़ा कर देता है
01:13कल का इंसान अकीदतों का मुझहर था
01:18लेकिन आज का इंसान हर अकीदत
01:22और हर अकीदे से आज़ाद है
01:25समुन्दर से दस दर्या निकाल लिए जाएं
01:29या दस दर्या शामिल कर दिये जाएं
01:33तो भी समुन्दर जू का तू रहता है
01:36जिस इंसान को अपने आप पर यकीन ना हो
01:41वो खुदा पर क्या यकीन रखेगा
01:45अगर इंसान का बातिन सादिक ना हो
01:50तो सदापत का मजभ उसे कोई फलाह नहीं दे सकता
01:55अगर किसी के दिल में अपनी कदर और एहमियत देखना चाहते हो
02:02तो बेवजह रूट कर देख लो अगर वो तुझे मना ले
02:08तो समझ जाना के उसकी जिन्दगी में तुम्हारी एहमियत है
02:14और अगर वो बुरा मान जाए तो वो तुम्हारे साथ कभी मुखलिस हो ही नहीं सकता
02:21अगर आप किसी को जिन्दगियों की आसानियों में शरीक नहीं करते तो सिर्फ इलम में शरीक करने का क्या फाइदा
02:32जब अल्लाह की रहमत हो जाए तो इंसान उसे अपना हक कह कर अपनी महनत और अपनी अकल का फल समझता है
02:45एक मारकीट में दुकानदार सुबह से शाम तक यकसा महनत करते हैं और शाम को नतीज़ा यकसा नहीं होता
02:57अगर छोटी बात को छोटा ना समझा जाए तो कोई बड़ी बात भी बड़ी ना रह जाए
03:06मामूली इंसान से महबब गेर मामूली इंसान का डर निकाल देती है
03:13जो शक्स अल्लाह के साथ हिसाब नहीं करता
03:18अल्लाह उसके साथ हिसाब नहीं करता
03:22अपनी दे को सावित नहीं किया जा सकता
03:25बस उसे तसलीम किया जा सकता है
03:29इसी तरह की वीडियोज देखने के लिए
03:32हमारे चैनल को सबस्क्राइब जरूर करें
03:36शुक्रिया
Comments