00:00इसलाम अर्दो मेवाद के मुआजिज नाजिरीन
00:04अस्सलाम वालीकूम
00:06बिस्मिल्लाहि रुर्छ्मान रुर्छीम
00:09जब हम अल्लाह का जिकर करते हैं
00:14तो उसके अपने इर्शाद के मताबिक
00:17वो हमारा जिकर करता है
00:20नेकी दर असल इनसानों के साथ नेक सुलूक का नाम है
00:26खाली नेकी तो कोई नेकी नहीं
00:30मुझरिम वो होगा जो कानून की जिद में आए
00:36और जो कानून की नजर से बच जाए
00:39वो मुझरिम ही नहीं कहलाएगा
00:42लेकिन लोगों की शमूलिएत के बाद गुनागार गुनागार है
00:49चाहे लोगों में नेको कारी ही क्यूना मशूर हो
00:55मुमकिन ही नहीं कि कोई शक्स मुकर्ब इलाही हो
00:59और इनसान की मु�حबत से महरूम हो
01:03ये दावा शेतानी है
01:06कि हम सिर्फ उह मुखबत करते हैं
01:10और इनसानों की महब्बत से हमें कुछ सरोकार नहीं
01:15अल्लाह एक तरफ ऐसे ऐसे सितारे बनाता है
01:20कि इनसान के तसवूर से भी बड़े
01:24और कहीं इतनी बारीकियों में तखलीक होती है
01:28कि इनसानी नजर की मजाल नहीं
01:32के इलक्ट्रोन के अंदर होने वाले जल्वों को देख सके
01:37अगर मुआशरे में बाजमीर लोग पेदा हो गए
01:42तो मुर्दा जमीर वो से ही रूपोश हो जाएंगे
01:48गुना की तलाश ही तो असल गुना है
01:53बुलंद फितरत इनसान पस्त हालात से गुजरें
01:58तो भी उनका मिजाज बस्त नहीं होता
02:02इसलाम से मुहबत करने का दावा
02:05करने वालो मुसल्मानों से नफरत न करो
02:10अगर किसी शक्स की एक आँख काम न करती हो
02:16तो उसे मुँपर काना नहीं कहना चाहिए
02:19हर चंद के ये सदाकत है
02:22मगर बत्तमीजी का मुझाहिरा है
02:26अल्लाह अदल करे
02:28तो बड़े बड़े जहांदार
02:31और जहांगीर लोग उसके आगे कांपते रहेंगे
02:36हर चीज़ को अज़त के साथ रहने दिया जाए
02:39तो अपने अज़त भी काइम रहती है
02:43मरीज होना गरीब होने की अब्तिदा है
02:47परेशानी हालात से नहीं
02:51खियालात से पेदा होती है
02:53वतन से बाहर रहने वाले को
02:57वतन की याद परेशान करती है
03:00और वतन में रहने वालों को
03:03बाहर जाने की तमना परेशान रखती है
03:06अगर इंसान तस्लीम कर ले
03:09कि उसकी जिन्दगी के साथ होने वाले
03:13वाकियात और जिन्दगी का अंजाम
03:16खालिक के हुकम से है
03:19तो ये परेशानी खतम हो सकती है
03:23इसी तरह की वीडियोज देखने के लिए
03:26हमारे चैनल को सबस्क्राइब जरूर करें
03:30शुक्रिया
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