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  • 5 months ago
ये हैं यासिन पठान. पश्चिम बंगाल में पश्चिम मिदनापुर जिले के निवासी. इन्होंने पथरा गांव की बदहाल मंदिरों में नई जान फूंकने के लिए जी-जान एक कर दी थी. माना जाता है कि ये मंदिर 200 साल से ज्यादा पुराने हैं. शिल्प के लिहाज से तो कम, लेकिन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक लिहाज से इनका काफी महत्व है. यासिन को बचपन से ही ये मंदिर लुभाते थे. मंदिरों की बदहाली से दुखी होकर यासिन ने उनके संरक्षण की मुहिम शुरू कर दी. यासीन की मुहिम रंग लाई. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने 2003 में इन मंदिरों को अपने नियंत्रण में ले लिया. आज ये मंदिर देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के आकर्षण का केंद्र हैं. इतिहास में रुचि रखने वाले जब मेदिनीपुर जाएं तो इन अद्भुत मंदिरों को देखना न भूलें. ये सिर्फ 14 किलोमीटर दूर हैं. साथ ही इन्हें संरक्षित करने के लिए अथक प्रयास करने वाले यासीन पठान को धन्यवाद दें.

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00:00ये हैं यासिन पठान पर्षिम मंगाल में पर्षिम मदनापुर्जले के निवासे इन्होंने पत्रा गाउं के बदहाल मंदिरों में नई जान फूकने के लिए जी जान एक करती थी
00:14मान जाता है कि ये मंदिर 200 साल से ज़्यादा पुराने हैं
00:20शिल्प के लिहाज से तो कम लेकिन एतिहासिक और सांसकर्तिक लिहाज से इनका काफी महतु है
00:44यासिन की मुहिम रंग लाई
01:11भारतिय प्रादत्तो समविक्षन विभाग ने 2003 में इन मंदिरों को अपने नियंत्रन में ले लिया
01:17आज ये मंदिर देश विदेश से आने वाले सलानियों के आकरशन का केंद्र है
01:23इतिहास में रुची रखने वाले सलानियों केंद्र है
01:53जब मैदनी पूर जाएं तो इन अदभुत मंदिरों को देखना ना भूलें
01:57ये सिर्फ 14 किलोमीटर दूर हैं
02:00साथ हे इन्हें सनलक्षित करने के लिए अधक व्याज करने वाले यासीन पठान को धन्यवादतें
02:07झाले जाएं धन्यवादतें
02:15झाले
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