00:00जाण सर्थान फिरे गत्जर फिरे लाए्ग विरेगे लेया...
00:10जाणू प्रिस्टना आहा व्युण
00:18जाण Зावन प्रिस्टना युण
00:24नए ऋ्लोडना आहा striking
00:27पर नहीं का
00:57आप क्या करना अब ये जो छटमा साथ में गरम में बलराम जी आए
01:24देवकी में तो छे पुत्रों से हालांके देवकी विचारी जर जर हो चुकी थी
01:30पूरा चेरा उसका जो है कुमला गया था
01:35क्योंकि छे चे पुत्रों की जिसकी जो है आँखों के सामने हत्या कर दी जाएं
01:40तो आप सो सकते कितना दुख होगा लेकिन जैसे ही बलराम आए
01:44हालांके माता देवकी को बहुत दुख था लेकिन जैसे ही बलराम आए
01:50हर सो का भी बरधना है माता देवकी का जो सोंदर ये था
01:56मानो हज्यारों सूरि उसके अंदर प्रवेस कर गये हैं ऐसा उसका सोंदर बढ़ गया था
02:02और जो है उसकी जो जुर्री पड़ गई थी बिलकुँ सरीर जो है सूख गया था
02:10बलराम के आने से एक दम माता देव की जो है फिर से जो है बिलकुर जैसी साधी हुई थी उससे भी और अच्छी वन गई इनते
02:19और मन में खूँ आनंद हो रहा था उनको बिलकुर छेचे बच्चों की जो टेंसन थी सब खतम हो गई
02:27लेकिन हर से सोक हाथ उस समय भी थोड़ा सोक था सोक क्या था हरस तो हो रहा था के ये मेरे जो बच्चा है न एको कोई साधन बच्चा नहीं लग रहा है
02:38लेकिन सोक इसी बात का हो रहा था
02:41कि दुष्ट कंस ने जैसे मेरे च्छे च्छे बच्चों को
02:44मेरी आँखों के सामने मार दिया है
02:46मौत के घाट उतार दिया है
02:48कहीं ऐसा नो कि साथ में बालक को भी कंस मार दे
02:52इसलिए कभी-कभी उस सोक आकुल हो जाती
02:55तो भगवान ने कहा
02:58माया से तुम क्या करो उस बच्चे को ले करके जाओ
03:02भगवान ने बच्चे को जो है
03:04कहा कि जो रोहनी है माता
03:06यह भी बसुदेव की ही पतनी है
03:08और बड़ी पतनी है
03:10इसलिए तुम जब उस बच्चे को ले करके जाएंगी
03:14तो भगवान ने बचे का नामकरण भी कर दिया था पहले ही
03:17यह भगवान है
03:21कृष्ण बलराम दोनों क्या है
03:24भगवान है
03:25तो कृष्ण जो है उनका नामकरण कर रहे है
03:29क्या नामकरण कर रहे है
03:31तो बोलते हैं
03:32गरव संकरसनात वै
03:34प्राहू संकरसन भुवि
03:39भगवान स्री कृष्णे कहा
03:50कि देखो तुम जब बसुदेव की पतनी के गरब से
03:54उस सब्त में बालक को ले करके जाएंगे
03:58यह सब्त में बालक कोई सादन बालक नहीं है
04:01यह साच्छात क्या है
04:04सेशस्य धाम मामकाम
04:07अनंत सेश हैं यह
04:09और देखा जाए तो धाम का यह मेरा धाम है
04:14धाम का मतलब जहां धाम ही रहता है
04:17बलराम जी भगवान के हम जो है
04:21इस कुछ संचेप में जा रहे हैं
04:22और रेडी हमने पहले बरान कर दिया था
04:24कि बलराम जो है भगवान के ऐसी कोई भी सेवा नहीं
04:29जो बलराम जी नहीं करती हैं
04:32तो पांच रूपों में जो है
04:34संसार के अंदर सेवा करती है
04:36संकरसन हाँ
04:37कारणदक साई
04:39गर्वोदक साई
04:40पयोब्द साई
04:41और से सस्य
04:43संकरसन के रूप में जो है
04:46यह नाम यहां हो रहा है संकरसन
04:48तो संकरसन का मतलब
04:50जो है कृष्णे कहा था कि जब तुम देवकी के गरब से उस बालक को ले करके करसन कड़के ले करके जब तुम रोहिनी के गरब में इसको इस्थापित करोगी तो इसलिए इनका नाम पड़ेगा बोलो संकर्षन भगवान के
05:06तो यह संकर्षन भगवान नाम है इनी संकर्षन के आसिरवासे क्रपासे आप देखेंगे आकास में जो है अनन्त अनन्त तारागन हैं जो प्रतिवी से लाखो लाखो गुना बड़े हैं लेकिन फिर भी ओ जो है ऐसे तेर रहे हैं जैसे कोई जो है गुबारा तेर रहा हूँ
05:36जो है गर्वोदक साई जितने भी ब्रह्मान्द है जैसे ब्रह्मान्द हमारा इसके ब्रह्मा जी चार मुखे हैं ऐसे ही आठ मुख वाले हैं सोले मुख वाले हैं हजार रहें लाक लाक मुखो वाले ब्रह्मा हैं और जिस ब्रह्मा का जितना मुख बड़ा होगा ब्रह्मान्
06:06करते हैं पहला संकरसन के रूप में फिर संकरसन से फिर जो है एक जो है क्या नाम है जो इसको बोलते हैं जो है क्या नाम है जो इस ब्रह्मांद का संचालन करता है तीन विष्णुओं के रूप में पहला है कारणदक्साई विष्णु ये कारणदक्साई विष्णु क्या करत
06:36ये क्या काम करते हैं एक काम ये करते हैं कि जो ब्रह्मान निकले अब ये गरुदग साही विश्णु क्या करेंगे आदे को पहले जल से भर देंगे और उसमें वो क्या करेंगे सेहन कर जाएंगे
06:48और उनकी नावी से फिर क्या निकलेगा कमल निकलेगा जो ब्रह्मा जी का जो है कमल से जिसका प्राकट्य होगा और ब्रह्मा जी फिर क्या करेंगे जो जीवात्मा है सारे जीव जो है ब्रह्मा जी निर्धारित करते हैं किसको कौन सा सरी दिये जाएगा उसके कर्म के अनुस
07:18लिए वो सरीर प्रदान करती है उनको जीवात्मा को तो इसलिए गर्वदा साई क्या करते हैं ब्रह्मा जी को स्रश्ठा के रूप में जो है उत्पन करते हैं फिर ये गर्वदाक साई विश्णू छीरोदाक साई विश्णू के रूप में परिवर्त दोते हैं इनका काम क्या
07:48बतार होते हैं सब छीरोदक्साई विश्णू से होते हैं किकना और दूसरा है कि भगवान परमात्मा के रूप में सब जगे व्यापते हैं हर व्यक्ति के अंदर परमात्मा है तो यह छीरोदक्साई दूसरा परमात्मा के रूप में अपना विस्तार करते हैं और अंत में पा
08:18कों से भगवान अनंत के गुड़ों का जो है गुड़गान कर रहे हैं अनंत अनंत वरसों से बास उनका एक एक काम है भगवान के कीरती का गुड़गान करना हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम राम हरे हरे पहला काम यह है �
08:48को जिसमें हम बैटे हैं, इसको अपने सर पर धारन करके रखता है, कैसे लगता है व्रहमांड अनंत सेस के जो है सर पार, मानो किसी ने राइका कोई सरसों का एक दाना रख दिया हूँ, इस प्रकार जो है, अनंत भगवान सारी सेवाय करते हैं, तो अनंत इस सब पाँच हो ओ
09:18गौलो कादी, अनन्त अनन्त जो बेकुंटे हैं, बलराम जी का ये एक्सपेंशन है, उनका ही जो विस्तार है, और उन धाम में भगवान के लिए जो भी सामग्री है, बो भी बलराम ही बनते हैं, हार चीज बलराम बन जाते हैं, भगवान का जो है साया है, बेड जिसको बोलत
09:48आप सोच लो सेवा का
09:50हलांक ये भगवान है
09:51लेकिन सेवा का कितना भाव है
09:55जो सेवा को होते हैं
09:57वो ही भगवत धाम में प्रवेश करते हैं
09:59जो मालिको होते हैं
10:00वो तो जो है नीचे के लोक में प्रवेश करते हैं
10:03मालिकों की
10:04मालिक नहीं जाते हैं
10:06वहां कौन जाते हैं?
10:07जोर से बोलो कोन जाते हैं?
10:10सेवक जाते हैं.
10:12जो सोद्था है कि नई, नई, मैं तो प्रभु का
10:15इटरनल सेवक हूँ.
10:16दासो असमी, जैसे हनुमान जी से पुचा,
10:19हनुमान, तुमारा आइडन्टी क्या है?
10:21रावण ने कहा
10:23मेरी आइडैंटी पुछना चाहते हो
10:24رावण मेरी आइडैंटी है
10:27उनोंने संस्कृत में बोला
10:29अहम रागवेंदर
10:31दासवसमी
10:32मेरी एक ईडैंटी है
10:34मैं प्रभूश्री रागवेंदर का
10:37दास हूँ
10:38यही मेरी आइडैंटी है
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