00:00जब भी हम सरस्वती नाम सुनते हैं तो मन में विद्या संगीत और शान्ती की छवी बनती है
00:09लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सरस्वती नाम का अर्थ क्या है और उनका जन्म कैसे हुआ
00:16ये कथा सिर्फ देवी की नहीं ज्यान के परकट होने की कहानी है
00:21सरस्वती नाम का असली अर्थ सरस्वती शब्द बना है सरस प्लस वती से
00:28सरस यानि प्रवह जल चेतना वती यानि जो धारण करे अर्धार्थ सरस्वती मतलब जो चेतना के प्रवह को धारण करती है
00:40इसलिए सरस्वती केवल पढ़ाई की देवी नहीं, बलकि विचार, वानी, संगीत और विवेग की अधिशास्त्री मानी गई
00:50पुराणों के अनुसार जब भ्रह्मा ने स्रश्टी की रचना की, तो स्रश्टी थी लेकिन उसमें विवस्था नहीं थी
00:58सब कुछ था पर दिशा नहीं थी, धोनी थी पर अर्थ नहीं था
01:02तब भ्रह्मा के मुक से एक दिव्वे शक्ती प्रकट हुई, यही शक्ती थी सरस्वती
01:08उन्होंने वानी दी, भाशा दी, संगीत दिया और ज्यान को आकार दिया
01:13इसलिए कहा गया ब्रह्मा सृष्टी के रच्यता है और सरस्वती सृष्टी को समझने की शक्ती
01:20सरस्वती नदी और देवी का संबंद
01:24प्राचीन भारत में सरस्वती केवल नदी नहीं, एक जीवन्त नदी भी थी
01:29ये संकेत देता है कि ज्यान कभी इस्थर नहीं होता, वो नदी की तरहां बहता है
01:35जहां सरस्वती बहती है, वहां सब्भेता जन्म लेती है
01:39सरस्वती का जन्म किसी एक दिन नहीं हुआ, वो तब प्रकट हुई जब विचार स्पष्ठ हो
01:46शब्द सत्य हो और ज्यान एंकार से मुक्त हो
01:50इसी लिए सरस्वती श्वेत वस्त्र धारन करती है
01:53जो है निर्मल चेतना का प्रतीक
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