00:00केरल में अब तक की सबसे भीशन प्राक्रतिक आपदा के एक साल बाद भी मुंडकई और चूरल माला विरान पड़े हैं
00:11यहां बस कुछ ही मकान सलामत रह गए हैं
00:14हाथसे में हुई भयानक तबाही और अपने को खोने का दर्द भुलाना नामुम्किन सा है
00:19यह जख्म ऐसा है जिसका एहसास बार बार रहेगा
00:22हालाकि इस तराज़नी के बीच मुंडकई और चूरल माला में बुलंद होसले और फिर उठखड़े होने की कहानिया भी कम नहीं है
00:3030 जुलाई 2024 के रात को नोफल ने अपने परिवार के 11 लोगों को खो दिया था
00:37जब भयानक हादसा हुआ तो नोफल विदेश में काम कर रहे थे
00:41वुस्खलन से हुई तबाही में उन्होंने अपना परिवार, घर और मुंडकई में अपनी जमीन सब कुछ गमा दिया
01:07सब कुछ खोदीने के बाद नोफल ने नए सिरे से अपनी जिंदकी की शिनवात की दोस्तों और रिष्टदारों की मदद से उन्होंने में पड़ी में एकुछ गमा दिया थे
01:37a bakery opened whose name is July 30.
02:07I don't know.
02:08But I don't know if there's a lot of problems.
02:11I don't know if there's a lot of problems.
02:13So I don't know.
02:15You don't know if there's a problem.
02:17I don't know.
02:17You don't know if you don't know if you don't know.
02:20I don't know if I don't know if you don't know.
02:23I don't know if you don't know.
02:25Nofal की कहानी दर्द और मुश्किल हालातों का सामना करते हुए
02:29जिंदिगी में हार ना मानने और आगे बढ़ने के लिए
02:32फिर उट खड़े होने की मिसाल है
02:34वे अपने परिवार के लोगों के खोने का गम
02:37और उनसे जुड़ी यादों को साथ लेकर
02:39जिन्दगी के सफर में आगे बढ़ रहे हैं
02:41अगर आप कभी केरल के में पड़ी जाएं
02:43तो जुलाई 30 बेकरी जाना ना भूलें
02:46वहाँ थोड़ी देर थमें लोफल के साथ एक प्याला चाय पिएं
02:50और उनकी इस बेकरी को चलाने में अपनी तरफ से
02:53छोटी सी मदद जरूर करें
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