00:00झाल झाल झाल
00:30मैं हजारों साल से बिना रुके बिना थके आप सभी का बच्चों की तरे पालन बोशन कर रही हूं
00:41मैं तब भी थी जब आप लोग नहीं थे और मैं तब भी रहूंगी जब आप लोग में ही रहेंगे
00:49पर अब ऐसा लगता है कि मैं धक रही हूँ
00:52आपकी धर्ती मा धक रही है
00:55रसायनों का छड़काव, रासायनिक खाथ
01:00और इन सब के कारण पानी इवब हवा में जहरीला बन
01:04यही कारण है कि मैं धक रही हूँ
01:07क्या आप जानते हैं कि इन रसायनों के जहरीले बंच से मेरी मिट्टी वैसे ही जलती है जैसे आपके शरीर पर कोई तेजार डाल दे
01:16लगता है मेरे बच्चों को मेरे दुख का अंदाज़ा नहीं है मेरी मिट्टी पंजर हो रही है
01:23ये रसाय मेरी मिट्टी के उपजाओ पंगो खट मगर रहे हैं और उससे पाई जाने वाला नमक मेरे शरीर पर मिर्च की तरह जल रहा है
01:33मेरी खटों की पैदावार कम हो रही है मैं धीरे धीरे और ठक रही हूँ
01:39लेकिन अब मुझे याद आता है कि पहले मैं बहुत सुन्दर थी बहुत प्रसन्न थी हमेशा हस्ती थी मुझे अब भी याद है
02:09मैं तुम्हारी मा सुन्दर क्यों न होती मुझे तो सुन्दर होना ही था क्योंकि बीते जमाने में आप मेरे बच्चे ही तो अपनी मा के रखवाले थे
02:27आप लोग प्राकृते खेती करते थे और फिर हमारी सभेता में तो प्रार्थनावी धर्ती कल्यान की है
02:35अंध्यो शांति रंतरिक्षग्वन शांति प्रिति वी शांति रापाह शांति रोशधयाह शांति वनस्पतयाह
02:56शांति विश्वे देवा शांति ब्रन्हा शांति सर्वग्वन शांति शांति योँ
03:11नदिया जंगल जरने परबत रखना इन्हे सवार के
03:28इनको रौनदा दुन न बचोगे धर्टी कहें पुकार के
03:33बे मौसम की बर्शा होती कहीं पिमित्ती बंजर बंटी बंजर मित्ती और भितपती धर्टी कहें पुकार के
03:44हजारों साल से मनुष्य धर्टी की गोद में रहता आया है लेकिन आज मैं आपसे पूछती हूं कि आपने इसके बदले धर्टी मा को क्या दिया ये जहरीले रसायन और प्राकृतिक खाट जो मिट्टी को बंजर कर रहे हैं उर्वरक्ता को बर्बाद कर रहे हैं आप अच्
04:14कि लंबे समय में उसी रासायने खाट का नुकसान भी है रासायने खाट जहर समान है और तो और फसलों में पानी की खपद भी बढ़ गई है जिससे खेती की लागत बढ़ रही है और पानी का सर्प समीन के काफी नीचे जा रहा है
04:31बच्चों मैं तुम्हारी मा हूँ मैंने तुम्हें सुक से जीदे के लिए पर्याप संसादन दिये हैं पर तुम्हारे लालच के पूर्ती के लिए नहीं दिये
04:50ऐसा लगता है कि थोड़ी सी अधेक पैदावार और अपने लालच के लिए आप सब अपनी अगली पीड़ी अपने बच्चे के भविश्य के बारे में सोचना भूल गए हैं
05:02सोचो चा तुम अपने बच्चों को ऐसे खेत देना चाहते हो जो बंजर हो
05:08अरे तुम तुम तो विंदी की बेटी हो मत्यप्रदेश की बेटी हो भारत की बेटी हो आओ तुम ही मेरे बच्चों को कुछ बताओ
05:25धर्टी मां हम तो अपने बिंद के सबय जनन का केवल इतने कहे चाही थे कि प्राकृतिक खेती या समय के माग बन चुकी है
05:35प्राकृतिक खेती या उद्देश के साथ हो थै कि जवने जमीन अओ हमरे मिट्टी के उर्वरक्ता बनी रहा है
05:43हम सबका प्रकृतिक के साथ मिट्टी जैसर ब्योहार करें चाही हम अपना से आमेवाली पीड़ी के तरों से या विशे का ध्यान दईके सुने और देखे के विंती करी थे
05:56अभी न संभले मेरे बच्चे तो फिर तुम पच्चताओगे
06:05नेचुरल फार भी न हुई तो हाथ धरे रह जाओगे
06:11मा का शोशड कौन है कर्ता कौन है मिट्टी सहर सभर्ता जब से जैवित खाद को छोड़ा खुश खाली से नाता तोड़ा
06:22अभी न संभले मेरे बच्चे तो फिर तुम पच्चताओगे
06:52करने के लिए ही मैंने जन्म लिया है करोणों सालों तक धर्ती पर सांसों की डोर आगे बढ़ाई पेट भरा जब सबका तभी मैंने संतुष्ठी पाई वो मा हूं मैं सबकी जिसे जन्म न देकर भी जीवन संभव बनाया
07:10अर्नदाता मेरे पुत्र किसान तुमने ही तो इसमें मेरा साथ निभाया दिन राज सीच पसीने से मुझको हर मू तक रोटी पहुचाई जब तुमने माथे मुझे लगाया मैं हर्याली बनकर मुस्काई
07:27मिठी बंजर होने से या धर्ती के नुकसान से किसी एक देश, एक द्वीब, एक समाज या एक धर्म का नुकसान नहीं है बलकि सभी का है क्योंकि सभी आपसने बंधे हैं
07:45धर्ती की शिंखला तुटी, माला तूटी सब बिखर जाएंगे, सब खत्म हो जाएंगे
07:57धर्तीक परिवार के जैसी सबका भविष्य है के वले
08:15बचे की धर्ती सभी बचेंगे जीवन पत्थ की माला ए
08:21हर जीवन पत्थ की माला ए हीरा मालिक बन्ना मोटी माना सबके रूप अने
08:39बचे की धर्ती सभी बचेंगे जीवन पत्थ की माला ए
08:45जीवन पत की माला आए
08:49अरे जीवन पत की माला आए
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