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Vat Savitri Puja 2025: वट सावित्री व्रत विशेष रूप से विवाहित स्त्रियों द्वारा अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन किया जाता है, और इसमें वट वृक्ष (बरगद का पेड़) की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसे में चलिए बताते हैं कि वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा कैसे करें:Vat Savitri Puja 2025: How to worship the banyan tree on Vat Savitri Vrat |

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~HT.318~PR.114~ED.118~
Transcript
00:00वर्ट सावित्री का वरत सुहाग इनिस्त्रियों के लिए खास माना गया है।
00:05सुहाग, संतान और सुख सम्रिधी की कामना का तेयोहार वर्ट सावित्री वरत इस साल 26 मई 2025 को मना जाएगा।
00:12इस दिन सुहागिन महिलाएं पती की लंबी आयू, अच्छे स्वास, सलामती और सुक सम्रिधी के लिए वरत करती हैं और बर्गत यानि की वर्ट वरिक्ष की पूजा करती हैं।
00:22इस साल वर्ट सावित्री वरत में अमरित योग का शुप सयोग बन रहा है जो की अत्यांत फल्दाई माना गया है।
00:29ऐसे में चलिए आपको बताते हैं कि इस दिन कैसे करें बर्गत के पेड़ की पूजा और कितनी परिक्रिमा लगानी चाहिए।
00:36वर्ट सावित्री वरत विशेश रूप से विवाहित इस्त्रियों द्वारा अपने पती की दिरगायू और सुक्सम्रिद्धी के लिए किया जाता है।
00:43जो महिला है वर्ट सावित्री का वरत रखती हैं वो सुबह ब्रह्मा उरत में उटकर स्नान करें और वरत का संकल्प लें।
00:49वही रोली, चावल, दूद, जल, फूल, फल, मिठाई, दीब, धागा यानि की सूत, साथ प्रकार के अनाज, लाल वस्त्र, पंचामरित, सुहाग समागरी जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, महंदी आदी।
01:02ये समागरी ले, इसके बाद बर्गत के पेड़ के नीचे जाकर एक साफ जगवनाएं, वहां मिट्टी से सावित्री और सत्यवान की मूर्ती या चित्रे स्थापित करें, साथी यम्राज की भी।
01:14वट्सावित्री व्रत कथा पढ़ें, इसमें सावित्री तोर अपने पती सत्यवान को यम्राज से वापस लाने की कथा कही जाती है, वट्वरिक्ष के जड़ में जल जढ़ाएं, दूद या पंचामरी से वरिक्ष को जड़ से स्नान कराएं, रोली चावल फूल अरपित क
01:44वट्वरिक्ष की आरती करें और सावित्री सत्यवान की पूजा करें, अंद में अपने पती की लंबी उम्र के लिए प्रात्ना करें, वहीं व्रत्पूर्ण होने पर ब्रामणों या जरुतमंदों को आप अनवस्त्र दक्षना दान कर सकते हैं, तो इस तरीके से आप वट
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