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राजस्थान की धरती वीरों, संतों और भक्तों की भूमि रही है। इस पवित्र भूमि पर जन्मे एक महान योद्धा और लोकदेवता, जिन्हें लोग श्रद्धा से 'बाबा रामदेव' या 'रामसा पीर' के नाम से पूजते हैं।
दरअसल, लोक कथाओं के अनुसार पृथ्वीराज चौहान को उनके नाना अनंगपाल तोमर ने अपना सम्पूर्ण राज्य सौंप दिया और तीर्थ यात्रा पर चले गए। तीर्थ यात्रा के बाद राजधानी दिल्ली लौटने पर सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने राजगद्दी लौटाने से मना कर दिया।
धार्मिक सम्राट अनंगपाल तोमर दिल्ली छोड़कर पाटन अर्थात आज के सीकर आ गए और अपनी राजधानी बनाई। अजमल जी तंवर उन्हीं अनंगपाल तोमर के वंशज थे।
अजमल जी तंवर की कोई संतान नहीं थी। इस कारण राजा अजमल और उनकी रानी मैणादे हमेशा दुखी रहते थे। संतान सुख से वंचित अजमल जी तंवर एक बार अपने महल की ओर जा रहे थे। उन्होंने देखा की उनके गांव के किसान बीज बोने के लिए अपने खेतों की ओर जा रहे हैं।
सुबह-सुबह सामने से अजमल जी तंवर को आते देखा तो किसान वापस अपने घरों की तरफ मुड़ गए। अजमल जी आश्चर्य हुआ तब उन्होंने किसानों को बुलाकर इसका कारण पूछा। किसानों ने झिझकते हुवे अजमल जी से कहा कि अन्नदाता आप निसंतान है और आप के सामने आने के कारण अपशगुन हो गया हैं। अजमल जी तंवर को यह सुनकर गहरा आघात लगा।
आखिर अब अजमल जी क्या करने वाले थे? क्या इस अपमान से टूटकर वे कोई बड़ा फैसला लेंगे? या फिर भाग्य में उनके लिए कुछ और ही लिखा था? जानने के लिए देखिए अगला भाग...!
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