00:00जब सुगना बाई ससुराल से लोट रही थी, तभी रास्ते में किसी मुस्लिम बादशाह ने उन्हें घेर लिया।
00:05सुगना मन ही मन पुकार उठी, भाई रामदेव, मेरी रक्षा करो।
00:09उधर रामदेव जी की शादी की रस में चल रही थी, मगर जैसे ही उन्हें अपनी बेहन के संकट का आभास हुआ, उन्होंने तुरंत रस में छोड़ दी, और वहां पहुँच गए, सिपाहियों ने तलवारें खीची, मगर प्रभु के चमतकार से वो सब फूलों की माला बन
00:39जी मुस्कुराय, ठाल खोला, और बिल्ली जीवित होकर वहां से भाग निकली, और फिर आया विवाह का पावन क्षण, रामदेव जी से विवाह कर रही थी, अमर कोट के राजा दल जी सौढ़ा की पुत्री, राजकुमारी नेतल दे, जो चल फिर भी नहीं सकती थी, फेर
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