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त्रिपुण्ड (Tripund) सिर्फ माथे का एक निशान नहीं, बल्कि शिवतत्व, ऊर्जा, और आत्मज्ञान का शक्तिशाली प्रतीक है।
इस वीडियो में जानिए—

तीन रेखाएँ वास्तव में क्या दर्शाती हैं?

बिभूति/राख लगाने का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण

क्यों त्रिपुण्ड आपके मन, बुद्धि और अहंकार को संतुलित करता है

पुराणों और श्रुति में इसका असली अर्थ

शिवभक्त इसे इतना पवित्र क्यों मानते हैं

ये वीडियो आपको त्रिपुण्ड के गहरे रहस्यों, शक्ति-केंद्रों और चेतना के स्तरों तक ले जाएगी।

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👉 कमेंट में बताएं—क्या आप त्रिपुण्ड लगाते हैं? किस कारण से?

#shiv #tripund #sanatandharm #mahadev

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Transcript
00:00पहली लकीर स्वर्ग लोग की, दूसरी पृत्वी की, तीसरी पाताल की तीनों मिलकर खोलती हैं वो नाड़ी जहां से ब्रह्म की उर्जा बहती है।
00:07यही है त्रिपुंड जो आपके भीतर के तीन गुण सत, रज, तम को संतोलित करता है।
00:12यह सिर्फ तीन लकीरें, नहीं यह शिवजी का सबसे बड़ा दुख और वैराग्य की निशानी है।
00:17हर लकीर में छिपा है पूरा ब्रह्मांड का कोड।
00:19विज्यान कहता है माथे पर चंदन या भस्म लगाने से कॉर्टिसोल 23 प्रतिशत घटता है।
00:24और यही कारण है कि योगी ध्यान में तुरंत प्रवेश करते हैं।
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