00:00मक्का से आए पांच बड़े पीर कुछ पल तक रामदेव जी को निहारते रहे और फिर मन ही मन मुस्कुरा दिये जैसे कह रहे हूं
00:08देखते हैं इस फकीर में क्या खास है लेकिन तब ही रामदेव जी बोले
00:12हे पीर जी आप हमारे अतिती हैं हमारे यहां महमान बिना भोजन किये नहीं जाते
00:17पीरों ने हलकी हंसी के साथ कहा हे रामदेव हम सिर्फ उन्हीं कटोरों में भोजन करते हैं जो हम मक्का में छोड़ कर आये थे
00:24अगर तुम सच में इतने बड़े पीर हो
00:26तो उन कटोरों को यहां मंगा दो
00:28फिर क्या?
00:29रामदेव जी मुस्कुराए और बोले
00:30हे पीर जी, राम और रहीम अलग नहीं
00:33एक ही है
00:34अगर यही आपकी इच्छा है
00:35तो मैं कटोरे मंगा देता हूँ
00:37उन्होंने अपनी दिव्य भुजा उठाई
00:38और चमतकार हो गया
00:40मक्का से पांचों कटोरे उड़ते हुए
00:41सीधे रूनी चाह पहुँचे
00:43और पीरों के सामने आकर गिर पड़े
00:45यह देखकर पांचों पीर चकित रह गए
00:47यह कैसे संभव है
00:49मक्का तो बहुत दूर है
00:50फिर कटोरे यहां कैसे आ गए
00:52पांचों पीर अब समझ चुके थे
00:53यह कोई साधारन संत नहीं
00:55यह तो खुदा के नूर का हिस्सा है
00:57वे रामदेव जी के चरणों में गिर पड़े
00:59हे रामदेव हम पीर हैं
01:01आप तो महान पीर हैं
01:03आज से दुनिया आपको रामपीर के नाम से जानेगी
01:05उन्होंने रामदेव जी को पीर की पदवी दी
01:07और वहीं भोजन किया
01:09तब ही से वे केवल रामदेव जी नहीं
01:11बलकि रामपीर कहलाने लगे
01:13फिर क्या हुआ
01:13जानने के लिए देखिए
01:15अगला भाग
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