00:00मैं जोर इस बात पर देता हूं कि महिला स्वयम अपने साथ क्या कर रही है
00:05वही पुरुष प्रधान समाज है
00:08वो महिला को कभी देवी भी बना सकता है, कभी दासी बना सकता है
00:12कभी कह सकता है ये सब तुमारे अधिकार है, कभी उसके कर्तव भी गिना सकता है
00:16कुछ भी करें वो बाहर वाले लोग है
00:19बाहर वाले लोग होते कौन है
00:20किसी मनुष्य को
00:22उसकी परिभाशा देने वाले है
00:24उसका स्थान बताने वाले
00:25असली बात ये है
00:26कि महिला स्वयम तै करे
00:29कि क्या उसका करतव है
00:31उसको घर में कितना करना है
00:32उसको बाहर कितना करना उसको कैसे जीना है
00:34और इसके लिए उसको कानूनी और सामाजिक और आर्थिक आजादी तो होनी चाहिए
00:40पर सबसे पहले मानसिक और आंतरिक आजादी होनी चाहिए
00:45वो बहुत बड़ी बात है
00:46नहीं तो आप कानूनी रूप से और वैधिक रूप से उसको कितना भी सशक्त कर दें, अगर भीतरी रूप से
00:54वो गुलाम ही बनी हुई है, तो फिर वो दूसरों का ही मोताकेगी कि मुझे और अधिकार दे दो, मुझे
01:01और रियायतें दे दो, मुझे और सम्मान दे दो, मुझ
01:16जंदगी में घुस करके हस्तक्षेप मैं करें, बल्कि उससे कहें कि तुम स्वतंत्र हो, तुम अपने फैसले आप करो, मैं
01:24कोई नहीं हूँ, तुम्हारे जीवन के फैसले तुम्हारी बिनाहा पर करने वाला, फैसले तुम खुद करो.