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वीडियो जानकारी: वेदांत संहिता - 18.10.2026

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Transcript
00:00लोग इतने मोटे क्यों हो जाते हैं उन्हें पता ही नहीं कि पेट मांग रहा था कि हंकार मांग रहा
00:07था पेट मांग रहा होता तो इतने मोटे नहीं होते जानवर नहीं मोटे होते जंगल में आपने कोई मोटी चड़िया
00:13देखी है उसके पास एक ही केंद्र है कौन सा प्राक
00:24क्रतिक और एक अहंकारिक
00:26तो खाना खा रहे हैं
00:28खाना सच पूछो तो वाजिब मांग किसकी है
00:32पर अहंकार कहेगा
00:34क्या मैं खाने पर चांदी का और सोने का वर्क लगवा सकता हूँ
00:39क्या मैं खाना किसी बहुत महंजी जगे खा सकता हूँ
00:43आपकी थाली है और आपका प्रेट है बस इन दोनों के बीच में रिष्टा होना चाहिए और किसी के बीच
00:47में नहीं
00:49लेकिन हंकार दलाल है वो बीच में आता है और सब घपला कर देता है
00:53वो बीच में घुस जाता है और कहता है नहीं खाने में तड़का लगाओ
00:58खाने में तड़का लगाओ
01:00वो खाने के माध्यम से
01:02psychological fulfillment ढूंडता है
01:05जबकि खाना होना चाहिए था
01:07सिर्फ physical nourishment के लिए
01:09पर हंकार आ गया है
01:11वो कह रहा है मुझे
01:12खाने के माध्यम से psychologically
01:14fulfill करो अभी ये बताओ खाना तो material है
01:17और जो psyche है
01:19वो तो non material है
01:21तो खाना क्या कभी psychological fulfillment दे सकता है
01:24वो नहीं दे पाता
01:26तो नतीजा क्या होता है
01:27आप और खाओगे और खाओगे और खाओगे और खाओगे
01:31आज दुनिया में
01:32भूख से मरने आलों की तादाद है पर कम है
01:34ज्यादा लोग मर रहे हैं
01:36उन भीमारियों से तो ज्यादा खाने से होती है
01:39क्यों?
01:40क्योंकि पेट के लिए खा रहे होते
01:42तो खाने की कोई उपरी सीमा अपर लिमिट होती
01:45पर जब आप इसके लिए खाते हो
01:47तो खाने की कोई अपर लिमिट नहीं होती
01:49आप कितना भी खाते हो
01:51अहंकार वो है भीतरी गुंडा
01:54भीतरी गुंडा
01:55वो दुनिया के हर विशे पर कबजा कर लेना चाहता है नाजायस कबजा

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