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वीडियो जानकारी: वेदांत संहिता - 25.10.2026

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Transcript
00:00आप किसी से प्रश्न करें अगर उधारन के लिए अपने घर में कि फलाने अंधविश्वास को क्यों मान रहे हो
00:05तो कहेंगे हम ही सब को जानते हैं और जिन्होंने चलाया था हो मूर्ख से क्या हम ही सब जानते
00:13हैं कि हम तुम्हें बता दें कि हम क्यों ये परंपरा मान रहे है
00:16अरे सब मानते हैं, पीछे से आ रही है, तो हम भी मानते हैं, हम होते कौन है जानने वाले,
00:23भला कौन जान सकता है, इसको इस तरक के रूप में ले लिया जाता है, कि आम आदमी के लिए
00:32जो आगे की बात है, जो ट्रांसेंडेंटल, पारलोकिक सचाई है, उसको जानना तो संभ
00:39संब्व है ही नहीं और चुकि उसको जानना संब्व नहीं है व्यक्ति के लिए इसीलिए चुक्चाप मांते रहो जो चलता
00:46है समाज में तो ये बात व्यक्ति बनाम समाज का रूप ले लेती है एक एक एक
00:54epistemic रूप में epistemic रूप समझते हैं कि ज्यान किसको संभव है ज्यान मीवान सा होती है न अपिस्टेमिलोजी हाँ
01:02तो कह रहे हैं वेक्ति को नहीं संभव है पर परंपरा को संभव है ग्यान किसको संभव है हम ही
01:09सब जानते हैं जो हमसे पूछ रहे होगी ये आप कड़ी पे दही क्यों डाल रहे हैं और फिर क्यों
01:15उसको पूरब क्यों रुचाल रहे हैं कि उससे शुब हो जाएगा कुछ ख�
01:33तो कहेंगे हम ही सब जानते हैं
01:35तो ये एक तरह की
01:36epistemic helplessness है
01:39बात समझ रहो
01:42कि जानने की
01:44मुझे में शक्ती ही नहीं है
01:46मैं नहीं जान सकता है
01:48लेकिन कौन जान सकता है
01:50समाथ जानता है
01:51परंपरा जानता है
01:52पुराने लोग थे
01:53बड़े भारी बहादूर
01:54वो सब जानते थे
01:55तो उन्होंने जो भी रित्रिवास बना दिये
01:57चुपचाप उनका पालन करते रहो
02:00हम थोड़ी जान सकते हैं

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