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  • 7 minutes ago
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की उस अर्जी पर सुनवाई करने से मना कर दिया, जिसमें उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज एक नए मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत मांगी थी. इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की. पीठ ने खान की याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दी और चीफ जस्टिस से कहा कि मामले की सुनवाई 16 नवंबर को डिवीजन पीठ के सामने रखी जाए. पीठ ने हाई कोर्ट से खान की याचिका पर 16 नवंबर को ही अंतरिम आदेश पारित करने को भी कहा. सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट हर मुमकिन स्टेज पर खान की मदद के लिए आगे आ रहा है और हमारी बस यही चिंता है कि हम हाई कोर्ट का हौसला नहीं तोड़ना चाहते. खान की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके क्लाइंट के बारे में एक हिस्ट्री है: 2006 में हुई घटनाओं के बारे में 2019 में उनके खिलाफ 26 एफआईआर दर्ज की गईं, और उन्होंने उन सभी 26 एफआईआर में जमानत हासिल की.

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00:12जिस्टिस न हमादेश के सामने का �илहाबाद हैंद्ध के सामने का नर्देश दिया और अंतरेमा देश पारित करने को भी
00:26कहा
00:26आजम खान ने वकील कपिल सिब्बल के जरीय सुनवाई के दोरान कहा, उन्होंने 2019 की ECIR फाइल की, जैसे ही
00:34मैं रहा हुआ, उन्होंने मुझे उस ECIR और 28 और मामलों में गिरफतार कर लिया, इसलिए मैं जेल में मरूंगा,
00:43मैं अपनी रक्षा करूंगा और हर चीज के लिए ल
00:56का आरोप लगाया और कहा कि जब उन्हें रिहा किया जाना था, तभी उन्हें गिरफतार कर लिया गया, हाइकोट ने
01:03दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान की 10 साल की सजा सस्पेंड कर
01:10दी थी, और दोनों को जमानत दे दी थी, ल
01:21आरेट

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