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वीडियो जानकारी: वेदांत संहिता - 18.10.2026

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Transcript
00:00मेरा खर्गोश था नंदू उसको बहुत बचाया मैंने बहुत बचाया उसको बचा नहीं पाया मैं और उसमें मेरी गल्ती थी
00:11खर्गोश अपनी बीमारी दिखाते नहीं और अब नया नया वो आया था मैं इतना समझ नहीं पाया कि बीमार हूँ
00:20मेरे साथ ही रहता था उसके �
00:21टांग में कुछ चोट थी तो मेरी टेबिल पर ही बैठता था और मैं काम करता रहा हूं तो आ
00:26करके मेरा हाथ चाटना शुरू करते खरगोश आम तोर पर ऐसा करते नहीं है पर उसकी मेरी कुछ खास जोड़ी
00:31बन गई थी
00:32मैं उन दिनों जमीन पर सोता था तो आ जाता था रात में और आके उपर ही मेरे बैठ जाए
00:39पिननीन खुलती थी तो देखता था वो खुछ खास तो वो चला गया उसके एगले ही दिन राजस्थान की एक
00:49उनिवरसिटी में मेरा सेशन था सत्र ऐसे ही तो मैं बैठा हुआ हू�
01:02नाच था और काच के बाहर उनका बहुत बड़ा लॉन था उसमें हरी हरी घास थी नंदू घास ही खाता
01:12था अभी जो खरगोश सब घास ही खाते हैं वो अब मैं कुछ भी कर लूँ वो मुझे दिखाई पड़
01:19रही है घास अब वो घास दिख रही है मैं रो रहा हूँ और �
01:24पूरे दुखों घंटे वैसे ही और सब स्टूडेंट्स हैं अपने कुश्चन्स पूछ रहा है मैं जवाब देता जा रहा हूँ
01:30फिर वहां पर जो उनके फेगल्टी कॉडिनेटर थे नोंने कहीं दिया कि मैंने का नहीं नहीं जैसे आख में कुछ
01:37चला गया है अब मैं उन
01:53के भी रोते हैं रोते हैं और छुपाने की कोई जरूरत नहीं है

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