00:00बिरहिन ओदी लाकडी सकुचे और धुदुआ है
00:04गिली लकडी में से धुदुआ निकलता देखा है किसी ने
00:07ओदी लाकडी ओदी माने गिली
00:10यह यह कहीं से गुजर रहे होंगे शाम के वक्त
00:12बारिश का समय रहा होगा
00:14तो शाम को चूला लगाया जा रहा है
00:19तो उसमें नहीं देखा गिली लकडी डाली गई है
00:22और वो उसमें फूख मार रही है कुछ कर रही है तो भी
00:24वो जल नहीं रही है तो उन्होंने बस खड़े होगा
00:26ऐसे देखा होगा और इतने में लियो यह आगया दोहा
00:31कि बिरही नोदी लाकडी सकुचे और धुधु आए
00:35आगे क्या है फूट पड़े या बिरह से जो सगली जली जाए
00:43क्यों तो ये बिरह में फसी हुई है तो जल जा
00:47तो पूरी जल जा तो विरोध करना छोड़ दे
00:50ये आत्मरक्षा तेरे किसी काम की नहीं है तो बच तो सकती ही नहीं
00:55तो जल जा वही नियती है तेरी और आग कोई बाहरी दुश्मन नहीं है
01:01आग तेरी छाती में बैठा हुआ प्यार है तेरा आग कोई बाहर से लेके नहीं आता
01:07बहर से तो बस थोड़ी सी आग दी जाती है
01:09एक संकेत के तौर पर
01:11एक आवंत्रण के तौर पर
01:13एक अनुस्मृति के तौर पर
01:17कि याद करो
01:18बहर से दिखाया जाता है कि देखो
01:21बहर इसको देखोगे तो तुम्हें याद आएगा
01:23कि तुम्हारे भीतर कौन है
01:24तो थोड़ी सी आग लाई जाती है लकडी के पास
01:27और बाहर की उस थोड़ी सी आग को देख करके
01:29भीतर की आग का उस लकडी को समरण हो जाता है
01:32वो जलना शुरू कर देती है
01:34बस निकाट आना पड़ता है
01:37जल जा
01:38और वो जल नहीं रही है वो बोल रही है राख हो जाओंगी
01:42हम लकडी और राख की तो बात कर रहे हैं न
01:47हम अपनी और आपकी बात कर रहे हैं
01:49लकडी और राख की नहीं
01:53अपनी और आपकी