00:00अभी कुछ दिन हैं दिपावली में, अभी से प्रण कर लीजिए कि क्या है जो आपके मन में जीवन में
00:10नहीं होना चाहिए और है उसको हटाना है
00:14हर दिवाली अपने जीवन से कुछ व्यर्थ, विशाक्त, दूशित, अनावश्यक चीजों को हटाते चलिए
00:24आपकी दिवाली सार्थक रहेगी, आपका मन जगमग रहेगा जो भी कुछ स्वस्थ मन के विरुद्ध है उसका त्याग करिए
00:32जीवन में जो कुछ भी अनावश्यक है, भले ही वो कितना भी ललचाता हो, चाहे डराता हो, उसका त्याग करिए
00:39ये है भाव दिवाली का, घर नहीं भरना है, मन खाली करना है, ये है दिवाली को मनाने का सही
00:49तरीका
00:51और जितना ज्यादा आप मन को अनावश्यक से खाली करते जाएंगे, उतना ज्यादा भीतर दिये जलते जाएंगे
01:00फिर वो जो भीतर दिये जले हैं, जो भीतर प्रकाश फूटा है, उसको आप बाहर भी अभिव्यक्त करें, फिर आप
01:08बाहर भी दिये जलाएं
01:09अतिरिक्त प्रकाश आपको चाहिए नहीं, भीतर प्रकाश पहले मौजूद है, बस उसके उपर से गंदगी हटानी है, जीवन से गंदगी
01:17हटाईए, ये दिवाली का संदेश है
01:21और जब भीतर आपको प्रकाश उठा आलोकित हुए, तो फिर बाहर दिया भी जला दीजिए, बाहर का दिया संकेत भर
01:28होगा ये बताने का कि देखो भीतर अब दिया जल गया है, पहले भीतर जले दिया