Skip to playerSkip to main content
  • 6 minutes ago
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संकेत दिया कि विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता जिससे दूसरों की आजीविका ठप हो जाए. अदालत ने उन दावों की समीक्षा करते हुए यह टिप्पणी की, जिनमें कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के चलते त्योहारी सीजन के दौरान दिल्ली में व्यापारिक गतिविधियों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है. विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार और व्यापार करने के अधिकार के बीच संतुलन बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि विरोध-प्रदर्शन के स्थानों का चयन इस तरह किया जाना चाहिए जिससे दिहाड़ी मजदूर, फेरीवाले और छोटे व्यापारी अपनी आजीविका के साधनों से वंचित न हों. अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि कोई एक समूह किसी स्थान पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं कर सकता. CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें किराना कमेटी दिल्ली की एक याचिका भी शामिल थी, जिसमें रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन के कारण बिजनेस के नुकसान का आरोप लगाया गया था.

Category

🗞
News
Transcript
00:27।
00:58the
00:59To be continued...
01:30This is not possible for the first 15 October.
Comments

Recommended