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  • 7 weeks ago
भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल चुनाव में मतगणना कर्मियों की नियुक्ति को लेकर दायर टीएमसी की याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि EC को कर्मचारियों के चयन का पूरा अधिकार है और उसके 13 अप्रैल के सर्कुलर में कोई खामी नहीं है. टीएमसी ने आरोप लगाया था कि केवल केंद्र सरकार और पीएसयू कर्मचारियों को सुपरवाइजर बनाया जा रहा है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं. हालांकि चुनाव आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य दोनों के कर्मचारियों का मिश्रण रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आगे किसी आदेश की जरूरत नहीं है. इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट भी इस याचिका को खारिज कर चुका था.

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00:00पशिमंगाल चुनाओं के बीच सुप्रीम कोट ने चुनावायोग के अधिकार को बरकरार रखा है।
00:05सुप्रीम कोट ने साफ कहा कि वोटों की गिनती के लिए करमचारियों का चैन करना इलेक्शन कमिशन का अधिकार है।
00:12तरणमूल कॉंग्रेस ने आरोब लगाया था कि काउंटिंग के लिए सिर्फ केंद्र सरकार और PSU करमचारियों को चुनना निश्पक्षता पर
00:20सवाल उठाता है।
00:21लेकिन कोट ने कहा कि चुनावायों के 13 अपरेल के सरकुलर में केंद्र और राज्य दोनों के करमचारियों का मिश्रण
00:28शामिल है।
00:29बेंच ने मामले में आगे किसी भी आदेश की जरूरत नहीं बताई है।
00:34कोट ने ये भी कहा कि रिटर्निंग ओफिसर को किसी भी सरकारी पूल में करमचारियों की तैनाती का अधिकार है।
00:41इससे पहले कलकता हाई कोट भी टेमसी की याचिका खारिच कर चुका है।
00:46पश्य मंगाल में दो चर्णों में मतदान हो चुका है और अब चार मई को मतगर्ना होनी है।
00:52सुप्रीम कोट के इस फैसले के बाद मतगर्ना की प्रक्रिया पर उठे सवालों को बड़ा जटका लगा है।
00:58अब सबकी नजर चार मई के नतीजों पर है।
01:01Bureau Report, ETV Bharat
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