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साल अठारह सौ पचानवे में असम के जंगलों से एक ऐसी ऐतिहासिक घटना सामने आई जिसने सबको हैरान कर दिया। वहां रेल पटरियां बिछाने का काम चल रहा था और एक ब्रिटिश यात्री ट्रेन तेजी से अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रही थी। अचानक लोकोपायलट को पटरी के ठीक बीच में एक विशाल जंगली हाथी खड़ा दिखाई दिया। चालक ने तुरंत आपातकालीन ब्रेक लगाए ताकि कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

जब ट्रेन रुकी तो यात्रियों ने देखा कि वह हाथी पटरी से हटने को बिलकुल तैयार नहीं था। वह बार बार अपनी सूंड से ट्रेन के इंजन को पीछे धकेलने की कोशिश कर रहा था। ट्रेन में मौजूद कर्मचारी हाथी को डराकर भगाने का प्रयास करने लगे लेकिन हाथी अपनी जगह पर डटा रहा। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि यह जंगली जानवर ऐसा क्यों कर रहा है।

कुछ देर बाद जब रेलवे कर्मचारी पटरियों के पास पहुंचे तो उन्हें असली वजह समझ आई। पटरी के नीचे एक दलदली गड्ढा था जिसमें उस हाथी का छोटा बच्चा फंसा हुआ था। वह हाथी अपनी जान की परवाह किए बिना केवल अपने बच्चे को बचाने के लिए उस भारी लोकोमोटिव ट्रेन के सामने खड़ा हो गया था।

कर्मचारियों ने तुरंत फावड़े उठाकर उस नन्हे हाथी को दलदल से बाहर निकाला। जैसे ही बच्चा सुरक्षित बाहर आया हाथी उसे अपने साथ लेकर जंगल की ओर चला गया। यह घटना साबित करती है कि मां का प्यार इंसानों तक सीमित नहीं है।

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अस्वीकरण: यह वीडियो केवल सूचना और मनोरंजन के लिए है। यह कहानी सार्वजनिक ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित है और इसमें दिखाए गए चित्र केवल विषय को समझाने के लिए हैं।

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