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भूटान के गासा जिले में 4,480 मीटर की ऊंचाई पर स्थित शिंताफू ग्लेशियल झील का प्राकृतिक बांध टूटने से भीषण बाढ़ आ गई। इस GLOF (Glacial Lake Outburst Flood) का असर भारत के पश्चिम बंगाल और असम तक पहुंचने का खतरा है। मो छू और संकोश नदियों में जलस्तर बढ़ने से अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और धुबरी में अलर्ट जारी किया गया है। 10 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। जानिए कैसे ग्लोबल वार्मिंग और ग्लेशियरों का पिघलना भारत के लिए नया जलवायु संकट बन रहा है।

A massive flood has struck Bhutan after the natural dam of the Shintaphu glacial lake, located at an altitude of 4,480 metres, burst, triggering a devastating Glacial Lake Outburst Flood (GLOF). The disaster poses a serious threat to India's West Bengal and Assam as water levels rise in the Mo Chhu and Sankosh rivers. Red alerts have been issued in Alipurduar, Jalpaiguri, Cooch Behar and Dhubri, while over 10,000 people have been evacuated to safer locations. Watch how global warming and rapidly melting glaciers are creating a growing climate crisis for India.

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00:17ग्लेशियर के पिघलने से बनी जील का प्राकृतिक बांध फटता है और 74 लाख घन मीटर पानी चट्टानों और मलबे
00:24को रौंतता हुआ नीचे की तरफ भागता है
00:26महस कुछ घंटों के भीतर सडकें बह जाती हैं बेली ब्रिज ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं और
00:33एतिहासिक गर्म पानी के ज़रने नक्षे से गायब हो जाते हैं ये तबाही भुटान के घासा जिले में आई है
00:39लेकिन इसका सीधा असर अब भारत के दर्वाजे पर है
00:42भुटान की उफनाई नदियों का पानी पश्चिम बंगाल और असम के मैदानी इलाकों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है
00:49अलीपुरद्वार से लेकर धुबरी तक हाई अलर्ट है दस हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजा गया है
00:56आखिर शिंताफ�
01:12परवत के ठीक नीचे 4,480 मीटर की उंचाई पर स्थित है शिंताफू जील दो दशमलव 3,8 लाक वर्ग
01:20मीटर में फैली इस ग्लेशियल जील में लाखों घन मीटर पानी जमा था गुरुबार की शाम को इस जील को
01:27रोके रखने वाली मिट्टी और पत्थरों की दीवार य
01:40खील फटने के बाद सैलाब सीधा मोचू नदी में गिरा, पानी की रफतार और ताकत इतनी ज्यादा थी कि भूटान
01:46का प्रसिद्ध घासा, साचू, गर्म पानी का जहरना पूरी तरह बह गया। सडकों का नाम और निशान मिट गया, सोलर
01:53प्रोजेक्ट तबाह हो गये और
01:55भूटान का लायाक शेत्र पूरी दुनिया से कट गया। पुनाखा के कवेसा गेवोग तक सिर्फ मलबा और तबाही नजर आ
02:02रही है। अब समझे कि भूटान के पहाडों में आई यह बाड भारत के लिए खत्रे की घंटी क्यों है।
02:08भूटान की मोचू नदी आगे जाकर
02:10फोच हू से मिलती है और फिर भारत की सीमा में प्रवेश करते ही इसे संकोश नदी कहा जाता है।
02:16यही संकोश नदी आगे जाकर असम में ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है। यानि भूटान के पहाडों का सारा पानी सीधे
02:22हमारे मैदानी इलाकों में बहकर आ रहा है। भू
02:4010,000 से ज्यादा लोगों को रातो रात रेस्क्यू करके स्कूलों और राहत शिविरों में पहुचाया गया। NDRF और SDRF
02:49की टी में मोर्चे पर तैनात हैं। असम के धुबरी जिले में संकोश नदी के किनारे निचले इलाकों को खाली
02:57कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री हिम
03:09मलबा और मृत मचलियाओं यह बताने के लिए काफी है कि उपर पहाडों में तबाही किस पैमाने पर हुई है।
03:15इस पूरी घटना का सबसे बड़ा सच यह है कि इस तबाही का अनुमान वैज्यानिकों ने आज से ठीक 5
03:21साल पहले लगा लिया था। साल 2021 में शोधकरता विल
03:39Potentially Dangerous Lakes में से एक है। बढ़ता तापमान ग्लेशियरों को पिघला रहा है जिससे इस जील का पानी लगातार
03:45बढ़ रहा है। अगर यह जील फटी तो 120 किलोमीटर दूर तक के हाइडरो प्रोजेक्ट्स, पुल और बस्तियां तबाह हो
03:54जाएंगी। आज 2026 में ठीक वही हु
03:57जिसकी भविश्यवानी वैज्ञानिकों ने 2021 में की थी। यह इस बात का सबूत है कि जब हम प्रकृति और विज्ञान
04:05की चेतावनियों को नजरंदाज करते हैं तो उसका अंजाम कितना भयानक होता है। यह सिर्फ एक जील के फटने की
04:12घटना नहीं है। यह पूरे हिंद
04:27भुटान में बीते कुछ दशकों में 23 प्रतिशत ग्लेशियर पिघल कर खत्म हो चुके हैं। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से
04:34ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। पहाडों पर पानी का दबाव बढ़ रहा है और कमजोर हो चुके प्राकृतिक बांध
04:42अचानक तूट
04:43रहे हैं। इस बार भारत और भुटान के बीच बने अरली वर्निंग सिस्टम ने काम किया और समय रहते सूचना
04:50मिल गई जिससे हजारों जिन्दगियां बच गई। लेकिन हर बार किस्मत साथ देगी यह कहना मुश्किल है। फिलहाल प्रशासन मुस्तैद
04:59है नदियों के �
05:00जलस्तर पर पल-पल नजर रखी जा रही है। अगर आप प्रभावित जिलों में हैं तो नदी के किनारों से
05:06दूर रहें और अफवाहों पर ध्यान न दें। लेकिन यह हादसा हमसे कड़वा सवाल पूछता है। जब तक पहाडों के
05:13बर्फ पिघल कर जल्बम बनते रहें
05:18या फिर जल्बायू परिवर्तन के इस खत्रे को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे। अपनी राय कमेंट में जरूर
05:25साजा करें। देश और दुनिया की हर प्रामानिक खबर के लिए देखते रहें वन इंडिया हिंदी।
05:48प्रामानिक

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