00:17ग्लेशियर के पिघलने से बनी जील का प्राकृतिक बांध फटता है और 74 लाख घन मीटर पानी चट्टानों और मलबे
00:24को रौंतता हुआ नीचे की तरफ भागता है
00:26महस कुछ घंटों के भीतर सडकें बह जाती हैं बेली ब्रिज ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं और
00:33एतिहासिक गर्म पानी के ज़रने नक्षे से गायब हो जाते हैं ये तबाही भुटान के घासा जिले में आई है
00:39लेकिन इसका सीधा असर अब भारत के दर्वाजे पर है
00:42भुटान की उफनाई नदियों का पानी पश्चिम बंगाल और असम के मैदानी इलाकों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है
00:49अलीपुरद्वार से लेकर धुबरी तक हाई अलर्ट है दस हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजा गया है
00:56आखिर शिंताफ�
01:12परवत के ठीक नीचे 4,480 मीटर की उंचाई पर स्थित है शिंताफू जील दो दशमलव 3,8 लाक वर्ग
01:20मीटर में फैली इस ग्लेशियल जील में लाखों घन मीटर पानी जमा था गुरुबार की शाम को इस जील को
01:27रोके रखने वाली मिट्टी और पत्थरों की दीवार य
01:40खील फटने के बाद सैलाब सीधा मोचू नदी में गिरा, पानी की रफतार और ताकत इतनी ज्यादा थी कि भूटान
01:46का प्रसिद्ध घासा, साचू, गर्म पानी का जहरना पूरी तरह बह गया। सडकों का नाम और निशान मिट गया, सोलर
01:53प्रोजेक्ट तबाह हो गये और
01:55भूटान का लायाक शेत्र पूरी दुनिया से कट गया। पुनाखा के कवेसा गेवोग तक सिर्फ मलबा और तबाही नजर आ
02:02रही है। अब समझे कि भूटान के पहाडों में आई यह बाड भारत के लिए खत्रे की घंटी क्यों है।
02:08भूटान की मोचू नदी आगे जाकर
02:10फोच हू से मिलती है और फिर भारत की सीमा में प्रवेश करते ही इसे संकोश नदी कहा जाता है।
02:16यही संकोश नदी आगे जाकर असम में ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है। यानि भूटान के पहाडों का सारा पानी सीधे
02:22हमारे मैदानी इलाकों में बहकर आ रहा है। भू
02:4010,000 से ज्यादा लोगों को रातो रात रेस्क्यू करके स्कूलों और राहत शिविरों में पहुचाया गया। NDRF और SDRF
02:49की टी में मोर्चे पर तैनात हैं। असम के धुबरी जिले में संकोश नदी के किनारे निचले इलाकों को खाली
02:57कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री हिम
03:09मलबा और मृत मचलियाओं यह बताने के लिए काफी है कि उपर पहाडों में तबाही किस पैमाने पर हुई है।
03:15इस पूरी घटना का सबसे बड़ा सच यह है कि इस तबाही का अनुमान वैज्यानिकों ने आज से ठीक 5
03:21साल पहले लगा लिया था। साल 2021 में शोधकरता विल
03:39Potentially Dangerous Lakes में से एक है। बढ़ता तापमान ग्लेशियरों को पिघला रहा है जिससे इस जील का पानी लगातार
03:45बढ़ रहा है। अगर यह जील फटी तो 120 किलोमीटर दूर तक के हाइडरो प्रोजेक्ट्स, पुल और बस्तियां तबाह हो
03:54जाएंगी। आज 2026 में ठीक वही हु
03:57जिसकी भविश्यवानी वैज्ञानिकों ने 2021 में की थी। यह इस बात का सबूत है कि जब हम प्रकृति और विज्ञान
04:05की चेतावनियों को नजरंदाज करते हैं तो उसका अंजाम कितना भयानक होता है। यह सिर्फ एक जील के फटने की
04:12घटना नहीं है। यह पूरे हिंद
04:27भुटान में बीते कुछ दशकों में 23 प्रतिशत ग्लेशियर पिघल कर खत्म हो चुके हैं। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से
04:34ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। पहाडों पर पानी का दबाव बढ़ रहा है और कमजोर हो चुके प्राकृतिक बांध
04:42अचानक तूट
04:43रहे हैं। इस बार भारत और भुटान के बीच बने अरली वर्निंग सिस्टम ने काम किया और समय रहते सूचना
04:50मिल गई जिससे हजारों जिन्दगियां बच गई। लेकिन हर बार किस्मत साथ देगी यह कहना मुश्किल है। फिलहाल प्रशासन मुस्तैद
04:59है नदियों के �
05:00जलस्तर पर पल-पल नजर रखी जा रही है। अगर आप प्रभावित जिलों में हैं तो नदी के किनारों से
05:06दूर रहें और अफवाहों पर ध्यान न दें। लेकिन यह हादसा हमसे कड़वा सवाल पूछता है। जब तक पहाडों के
05:13बर्फ पिघल कर जल्बम बनते रहें
05:18या फिर जल्बायू परिवर्तन के इस खत्रे को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे। अपनी राय कमेंट में जरूर
05:25साजा करें। देश और दुनिया की हर प्रामानिक खबर के लिए देखते रहें वन इंडिया हिंदी।
05:48प्रामानिक