00:03नेपाल की जमीन पर 26 अगस्त की उस तबाही के जक्म दर्ज हैं जिन्हें भरने में शायद बहुत लंबा वक्त
00:10लगेगा
00:11एक भीशन प्राकृतिक त्रासदी ने देखते ही देखते सब कुछ हुजार दिया
00:17कहीं घर के घर गायब हो गए तो कहीं पूरी की पूरी बस्तियां पानी के तेज बाहव में बह गए
00:23जो कुछ बचा है वो मलबी और तबाही की कहानी बया कर रहा है
00:30बताया ज़ा रहा है कि बर्फ का पहार तूटने के बाद त्रिशूली नदी में अच्वानक आई बार ने विनाश को
00:36ऐसा रूप दिखाया
00:38जिसने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया
00:58पूलिस सेतार ने रह श्री तान कर निकाल का हम लोग कि अधर ना बजे के आसपास बुद़वार के दिनकम
01:03से हम लोग कर कोई था पता नहीं था बुद़वार कर दिन
01:06हम लोग अपने कामे अपने बेस्त हो जब हम लोग देखिये ना अधमी से जा रहा है तो हम लोग
01:10बोले यह कि तिर्सुली खुल का पुराना खुल है ना
01:15वहां पर देखें सार पचास फीत इतना दूरा पानी आ रहा है तब देखकर हम लोग भागे भागे तो यहां
01:21गने समन्दी था ना उसी जगह हम लोग फास इतना पाकली नीचे के गाउं के सभी लोग निकल पाए या
01:25कुछ लोग बहविज है कितना लोग सलसर बजार गो साइ
01:41पर इसे ख़ानी आपने व यह था नहीं को निया रहते है वहां अको यहां रहते हैं थे खाते टे
01:56कमाते मलोग कुछ भी नहीं सवरण बहुंत आपने के लिए पईसा भी नहीं एक राए ठान पर यह भार भी
02:02लेकर आदे पाचा भी दो हुटा उनको बचा दूरम परिबार क
02:09पाचा भी दूटा था, आमको भी सुरक्षिती पाचा मी शरू राखे हुए था, हम लोग छोड़ा था, श्यानो ना, बहुत
02:15भाग्षा, पक्रिदियाल गर है, सर्मुतियारिम, सब अच्छा है, सुरक्षिती पाग्मानी किरपासे, यह यह है कि हम लोग खाने के कुछ
02:23भी न
02:43पानी का बहाव इतना तेज था, कि रास्ते, सडक्या और इमारते तक इसकी चपेट में आ गई, लेकिन इस प्रले
02:51के बीच कुछ ऐसी जिन्दिगियां भी थी, जिन्होंने मौत के सेलाप के आगेहार नहीं मानी,
03:00रेस्क्यू टीमों ने मुश्किल हालात के बीच कई लोगों को सुरक्षित बहार निकाला, तबाही के बाद सबसे बड़ा दर्द उन
03:07परिवारों का है, जिन्होंने अपनों को खो दिया है, आखों में आसू है और दिल में सिर्फ एक उम्मीद, श्वायद
03:15लापता अपना
03:16किसी तरह वापिस मिल जाए।
03:46किसी तरह वापिस मिल जाए।
04:16किसी तरह वापता अपना
04:18किसी तरह वापता अपना