00:22पहाडों में तबाही हमेशा शोर मचा कर नहीं आती, कई बार उपर बर्फ के बीच एक झील बनती है, पानी
00:28चुपचाप जमा होता रहता है
00:29और फिर एक दिन उसका बांध टूट जाता है, इसके बाद जो सैलाब नीचे उतरता है, उसे संभालने का मौका
00:35शायद ही किसी को मिलता है
00:36नेपाल में 26 अगस्त को भोटे कोशी नदी में आई अचानक बाढ़ने, इसी खत्रे की तस्वीर सामने रग दी है
00:42अब सवाल है कि क्या हिमाले के भारतिय हिस्से में भी ऐसी तबाही का खत्रा बढ़ रहा है
00:4726 अगस्त की सुभह करीब 9 बजे, तिबबत से लगे नेपाल के रसुआ जिले में भोटे कोशी नदी अचानक उफान
00:53परागई
00:53कुछी मिनिटों में सडकें, इमार्तें और नदी किनारे के इलाके पानी और मलबे की चपेट में आ गए
00:58दिये गए आकड़ों के मुताबिक इस घटना में 160 लोगों की मौत की पुष्टी हुई है और 1000 से ज्यादा
01:04लोग ला पता है
01:04इनमें भारत, अमेरिका समेट कई देशों के नागरिक भी शामिल बताए जा रहे है
01:09शुरुवाती आकलन में इस तबाही की वज़े ग्लेशियर लेक आउट बर्स्ट फ्लड यानि जी लोएफ को माना जा रहा है
01:14आसान भाषा में समझे तो पहाडों पर जमा ग्लेशियर जब तेजी से पिखलते हैं तो उनका पानी किसी जगह पर
01:19जमा होकर बड़ी जील बना सकता है
01:21इस जील को अक्सर बर्फ, चटान या पहाड के मलबे से बना प्राकृतिक बांध रोग कर रखता है
01:26अगर ये बांध अचानक तूट जाए तो जील का जमा पानी तेज रफतार से नीचे की तरफ दोड़ पड़ता है
01:30इसी घटना को GLOF कहा जाता है
01:33नेपाल में ऐसा खत्रा नया नहीं है
01:35जुलाई 2025 में भी इसी इलाके में GLACIER जील तूटने से अचानक बाढ़ हाई थी
01:39जिसमें 9 लोगों की मौत हुई थी
01:41लगातार ऐसी घटना ये सवाल खड़ा करती हैं कि क्या हिमाले में GLACIER जीलों का खत्रा बढ़ रहा है
01:46इस सवाल का जवाब भारत के हिमाचल प्रदेश से जुड़ी एक नई स्टडी में भी मिलता है
01:50IIT रोपड और सिडनी की University of Technology की साजा रिसर्च के मुताबक
01:54हिमाचल प्रदेश में GLACIER जीलों की संख्या 1990 में 107 थी
01:582024 तक ये संख्या बढ़कर 679 हो गई
02:01यानी करीब 525 फीजदी की बढ़ोतरी
02:04इन 679 जीलों में से 88 को संभावित GLOF के लिहाज से
02:08खास खत्रेवाली जीलों के रूप में देखा गया है
02:10इन में 9 को बेहत ज्यादा खतरनाक, 18 को ज्यादा खतरनाक
02:13और 26 को मध्यम खत्रेवाली श्रेणी में रखा गया है
02:17रिसर्च में ब्यास बेसिंग की हिमसू जील
02:19और सतलुज बेसिंग की एक बेनाम जील की खास तोर पर मॉडलिंग की गई
02:22अनुमान के मुताबिक अगर ब्यास बेसिंग की जील का प्राकृतिक बांध तूटता है
02:25तो करीब 1385 क्यूबिक मीटर प्रती सेकंड पानी का बहाव आ सकता है
02:29यानि हर सेकंड करीब 14 लाक लीटर पानी
02:32सतलुज बेसिंग की जील के लिए ये अनुमान और बड़ा है
02:35यहां करीब 3,507 क्यूबिक मीटर प्रती सेकंड पानी के बहाव की आशंखा जताई गई है
02:39ऐसे सहलाब से बांध, बिजली परियोजनाओं और सैक्रों इमारतों को खत्रा हो सकता है
02:43इस खत्रे के पीछे जलवायों परिवर्तन भी एक एहम कारण है
02:47जुलाई 2026 में सामने आई IIT खड़कपुर की एक स्टडी के मुताबिक
02:50उचाई वाले हिमालेई इलाकों का तापमान पिछले दो दशकों में करीब एक डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है
02:56तापमान बढ़ने का मतलब है कि गलेशियरों के पिघलने की रफतार और जीलों में जमापानी की मातरा बदल सकती है
03:01हालाकि हर गलेशियर जील का मतलब ये नहीं कि वो जल्द ही भट जाएगी
03:04किसी जील का खत्रा उसके आकार, पानी की मातरा, प्राकृतिक बांध की मजबूती और आसपास की भोगोलिक स्तिती पर निरबर
03:10करता है
03:11लेकिन नेपाल की घटना ने एक बात साफ करती है
03:13हिमाले में खत्रा सिर्फ पहाडों पर नहीं बनता, उसका असर सैक और किलोमिटर नीचे तक पहुँच सकता है
03:18इसलिए सवाल ये नहीं है कि अगली जीलोएफ कटना कहा होगी
03:21असली सवाल ये है कि क्या भारत के पास खत्रे वाली इन 88 जीलों की लगातार निगरानी और समय रहते
03:26चेतावनी बेने की परियाप्त विवस्ता है
03:28क्योंकि पहाडों में जमा पानी दिखाई भले ना दे
03:30लेकिन अगर उसका रास्ता खुल गया तो नीचे रहने वालों के पास बचने के लिए समय बहुत कम हो सकता
03:35है
03:35क्योंकि अपर कुल है
04:05झाल