00:10कहते हैं कि जब कुदरत अपने सबसे खौफनाक रूप में आती है तो बड़े बड़े पहार तूट जाते हैं
00:16पक्के मकान तिनके की तरह बेचाते हैं और चारो तरफ सिर्फ मौत का सन्नाटा चा जाता है
00:23लेकिन उसी सन्नाटे को चीर कर जब कोई नंधी सी जान मुस्कुराती है तो दुनिया समझ जाती है कि जाको
00:29राके साई या मार सके ना कोई
00:31आज हम आपको नेपाल के उस खौफनाक मंजर की कहानी बताने जा रहे हैं जहां मौत 72 घंटे तक मलवे
00:38के नीचे पहरा देती रही
00:40लेकिन 6 साल की मासूम ने मौत को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया
00:45इस समय हमारा पडोसी देश नेपाल इत्यास की सबसे दल्दनाक और विनाशकारी बाड का सामना कर रहा है
00:51भोटे कोशी नदी के उफान और लांस्लाइड ने वहां ऐसी तबाही मचाई है जिसकी कलपना मातर से ही रूह काप
00:58जाए
00:58भारतिय विदेश मंद्राले और नेपाल प्रसाशन के ताजा आकड़ों के मताबिक इस भीशन कुदरती आफ़त में अब तक 675 से
01:06जादा लोगों की जान जा चुकी है
01:08जबकि 2400 से जादा लोग अभी भी लापता है
01:11अपनों को खोच चुके लोगों का रो रोकर बुरा हाल है
01:15रिस्क्यू उपरेशन में हर बीते घंटे की बाद मलबी से लाशे बाहर आ रही
01:35इस अबाही की आज सीमा पारकर भारत तक भी पहुची
01:39वुदेश मत्राले के अनुसार बाड में 275 भारती नागरिक और 128 भारती मूल के लोग लापता है
01:45आला की राहत की बात यह है कि अब तक 108 भारतियों को सुरक्षुत रस्क्यू किया जा चुका है
01:50और चीन के रास्ते 598 भारती नागरिक सुरक्षुत नेपाल पहुचे हैं जबकि 900 नागरिकों को वहां से निकालना अभी बाकी
01:58है
01:58लेकिन तबाही कि इस भयानक आखड़े के बीच नेपाल के रसुवा जुलेगे टिमूरे इलाके से कैसी खबर आई है जुसे
02:04सुनकर आपकी आँखों में आसू भी आ जाएंगे और उम्मीद की एक नई किरण भी जागी की
02:10रसुवा का टिमूरे इलाका जो भोटे कोशी नदी की बार के बाद पूरी तरह मलबे का धेर बन चुका था
02:16वहां नेपाल आम्ट पुलिस फोस की एक टीम मलबे के नीचे जिंदगी की किसी बचे खुचे निशान की तलाश कर
02:22रही थी
02:23चारो तरफ सिर्फ मिटी तूटे हुए पत्थर लोहे के सरी और बर्बादी का सनाटा था
02:28जवाने के कदम फूक फूक कर रख रहे थे तब ही अचानक मलबे के गहरे धेर के नीचे से एक
02:33बहुत ही धीमी बहुत ही कमजोर अवास सुनाई दी
02:36वो किसी के रोने के आवास थी एक मासूम बच्चे के बिलखने की आवास शशत्र पुलिस के जवानों के पैर
02:43वही ठिटक गए
02:44जवानों को लगा शायद ये उनका भ्रहम है क्योंकि तीन दिन यानि पूरे 72 घंटे बीच चुके थे
02:50बिना अन, बिना पाणी और भारी मलबे के नीचे जहां सास लेना भी मुम्किन नहीं होता
02:55वहाँ तीन दिनों तक किसी का जिन्दा रहना बेग्यानिक रूप से भी किसी चमतकार से कम नहीं था
03:02लेकिन जवानों ने एक पल की भी देरी नहीं की, उन्होंने भारी मशीनों का इंतजार करने की बजाए अपने हाथों
03:08से ही मलबे और पथरों को हटाना शुरू कर दिया
03:11जवानों की उंगलिया जखमी हो रही थी लेकिन दिल में बस एक ही जित थी उस मासूम की सासों को
03:17बचाना है
03:17और फिर जब मल्बे की आखरी परत हटी तो वहां मौजूर हर जवान की आखें नम हो गए
03:23मिट्टी से सनी, डरी से हमी लेकिन जिन्दा छे साल की मासूम बच्ची सुरक्षा कर्मियों की गोद में थी
03:3072 घंटे तक मौत को मात देकर वो नन्ही परी बाहर आई थी
03:35लेकिन कहानी है इक हत्म नहीं हूँ
03:37मलबी से निकालने की बाद बच्ची को तुरंट टिमुरे की बॉडर आउट पोस ले जाया गया
03:42तीन दिनों तक भूके प्यासे रहने के कारण बच्ची का शेरीर बहुत ज्यादा कमजूर हो चुका था
03:46उसकी सासे उखडने लगी थी
03:48डॉक्टर उनिसाफ कहा कि अगर बच्ची को बचाना है तो उसे तुरंट राजधानी काट मांडू के बड़े अस्पताल पहुचाना होगा
03:57शुकरवार रात को ही हेलिकॉप्टर से उसे काट मांडू भीजने का फैसला किया गया
04:01लेकिन कुद्रज जैसे अभी भी परिक्षा ले रही थी रात का घणा अंधेरा और पहाडों पर चाया खराब मौसम हेलिकॉप्टर
04:09की उडान में विलन बन गया
04:19पूरी राज जवानों और डॉक्टर उने टिमुरे में ही उस बच्ची की सासों को थामे रखा
04:26और आखिरकार श्रणी बार दो पहे जब मौसम पुड़ा साफ हुआ तो हिलकॉप्टर से उस मासून को काट मांडू लाया
04:32गया
04:32जहां इस वक्ट डॉक्टर उके एक विशेश टीम उसकी निक्रानी कर रही
04:36इस बच्ची का जिंदा बच्चना यकीनन नेपाल के लोगों के लिए इस महा तबाही के बीच उमीद की सबसे बड़ी
04:42रोश्णी है
04:43लेकिन नेपाल के लिए खत्रा भी पूरी तरह टला नहीं
04:45मौसम विभाग और साटलाइट डस्वीरों से पता चुला है कि दिबबत के इलाकों में भारी बारिश के कारण नई जीले
04:52बन गई
04:52अगर ये जीले ओवरफ्लो हुई या फटी तो नेपाल के नदियों में एक बार फिर तबाही का सैलाब आ सकता
04:59है
05:01एजेंसिया अलर्ट मोड पर है और एसकी ओपरेशन यू दिस्तर पर जारी है
05:05टेमरोई कि ये 6 साल की बच्ची आज सिर्फ एक जिन्दा इंसान नहीं है
05:08वो प्रतीक है उस इंसानियत और उमीद का जो सबसे घने अंधेरे में भी हार नहीं मानती
05:14जब 3 दिनों तक मिट्टी और पत्थरों के भारी बूझ के नीचे दबी वो 6 साल की नन्ही बच्ची अपनी
05:20सासों की जंग जीत सकती है
05:22तो क्या हम और आप जिंदगी की छोटी मूटी मुश्किलों से हार मान सकते है
05:26निपाल की उस अस्पिताल की कमरे में चल रही उस मासूम की एक एक सास आज पूरी दुनिया को यही
05:32सिखा रही
05:32उमीद कभी नहीं मरती जब तक जीने की जिविशा कायम
05:37निपाल के बाट पेरितों पर जैसे ही कुई अपडेट आती है हम सबसे पहले आप तक पहुचाएंगे
05:41आप देखते रहे वन इंडिया हिंदी