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सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का (Mecca) में दो बांग्लादेशी नागरिकों, नज़रुल इस्लाम (Nazrul Islam) और सीती अख्तर (Siti Akhter) को फांसी दिए जाने के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, दोनों को एक मस्जिद में कथित तौर पर अनैतिक कृत्य (Immoral Act) करने का दोषी पाया गया था। हालांकि, सोशल मीडिया पर चुंबन (Kissing Claim) को लेकर किए जा रहे दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही दोनों के शादीशुदा होने के ठोस सबूत मिले हैं।

Two Bangladeshi nationals, Nazrul Islam and Siti Akhter, were executed in Mecca, Saudi Arabia, after being convicted of alleged immoral acts inside a mosque. The case has sparked severe outrage and legal debates surrounding Saudi Arabia's 'Ta'zir' law (discretionary punishment under Islamic jurisprudence). Watch the full video to understand the complete timeline, legal aspects, and claims surrounding this controversial story.

#SaudiArabia #MeccaExecution #TazirLaw #OneindiaHindi

~HT.178~PR.250~ED.110~GR.122~VG.HM~

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00:04सूदी अरब के पवित्र शहर मक्का में दो बांगला देशी नागरिकों को मौत की सजा दिये जाने का मामला कई
00:10गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
00:30सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर्वकृत्य क्या था? जिसके लिए दोनों को इतनी कठोर सजा मिली? कुछ खबरों और
00:37सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि दोनों मस्जित के अंदर एक दूसरे को चूम रहे थे।
01:00को नहीं जानता था। उन्होंने सुना था कि दोनों एक ही जगे काम करते थे। परिवार के एक सदस्य के
01:06मताबिक नजरुल ने कभी सीती के साथ प्रेम संबंध होने की बात स्विकार की थी। लेकिन इससे यह साबित नहीं
01:12होता कि दोनों शादी शुदा थे या उनके बी�
01:29जीर इसलामी न्याय शास्त्र में सजा की उस श्रेणी को कहा जाता है, जिसमें किसी अपराध के लिए सजा की
01:36निश्चित मात्रा पहले से तै नहीं होती। न्यायाधीश मामले की परिस्थितियों, अपराध की प्रकृती और लागु कानूनी नियमों के आधार
01:45पर सजा न
01:59भाशा में समझे तो ताजीर के तहट अलग-अलग मामलों में अपराध की गंभीरता और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग
02:05सजाएं दी जा सकती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हर अपराध के लिए मौत की सजा दी
02:11जा सकती है, किसी खास मामले में मौत की सज
02:14का कानूनी आधार क्या है इसे समझने के लिए संबंधित कानून अदालत के फैसले और मामले में पेश किये गए
02:21सबूतों की जानकारी होना जरूरी है
02:23इसलामी कानून में सजाओं की तीन प्रमुक श्रेणिया बताई जाती है
02:27पहली है कसास जो मुख्य रूप से हत्या और शारीरिक नुकसान जैसे मामलों में बदले के सिध्धान्त से जुड़ी है
02:34दूसरी है हुदूद जिसमें कुछ खास अपराधों के लिए निर्धारित सजाओं का प्रावधान है
02:40तीसरी है ताजीर जिसमें संबंधित कानूनी व्यवस्था के तहट न्यायाधीश को सजा निर्धारित करने का विवेक अधिकार मिलता है
02:48यही वज़ा है कि नजरुल और सीती के मामले में ताजीर का उलेक महत्वपूर्ण हो जाता है
02:54मौत की सजा अपने आप में बेहद गंभीर है
02:57इसलिए यह जानना जरूरी है कि अदालत ने किन सबूतों के आधार पर दोनों को दोशी ठहराया
03:04और इतनी कठोर सजा देने के लिए क्या कानूनी आधार अपनाया
03:07सउधी अधिकारियों ने बताया कि संबंधित न्याएक अधिकारियों ने सजा को बरकरार रखा
03:12और इसके बाद शाही आदेश जारी किया गया
03:1514 अक्टूबर को सजा लागू कर दी गई
03:18लेकिन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में कथित कृत्य का विस्तरित विवरन
03:22अदालत में पेश किये गए सबूत और सुनवाई की पूरी प्रक्रिया सामने नहीं आई है
03:27यही बात बांगलादेश में नाराजगी की बड़ी वजह बनी है
04:00परिवार के मताबिक
04:01उन्हें नजरुल की मौत की जानकारी फोन के जरिये मिली
04:05इस खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया
04:08नजरुल नवंबर 2022 में सौधी अरब गए थे
04:12और मक्का की मस्जिद अलहरम में सफाई कर्मी के रूप में काम करते थे
04:16उनके परिवार के अनुसार करीब आठ महीने बाद उन्हें गिरफतार कर लिया गया था
04:21और वो फांसी दिये जाने तक जेल में रहे
04:24दूसरी ओर सीती के बारे में सार्वजनिक जानकारी सीमित है
04:28उनके और नजरुल के संबंधों को लेकर भी कई सवाल है
04:31जिनके जवाब अभी स्पष्ट नहीं है
04:34सौधी अरब दुनिया के उन देशों में शामिल है
04:36जहां मौत की सजा का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है
04:40नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों सहित विभिन मामलों में भी
04:44वहां मृत्युदंड दिया जाता रहा है
04:46मानवाधिकार संगठनों ने सौधी अरब की न्याईक प्रक्रिया में पार दर्शिता
04:51निश्पक्ष सुनवाई और मृत्युदंड के इस्तिमाल को लेकर लंबे समय से चिंता जताई है
04:56हालांकि इस मामले में किसी निश्कर्ष पर पहुँचने से पहले यह जानना जरूरी है
05:01कि अदालत ने वास्तव में क्या पाया था
05:03केवल सोशल मीडिया पर किये गए चुम्बन के दावे को आधार बना कर
05:08ये कहना सही नहीं होगा कि दोनों को उसी वजह से मौत की सजा दी गई
05:12न तो पति-पत्नी होने की पुष्टी हुई है और नहीं कथि चुम्बन की बात प्रमानित हुई है
05:17इस पूरे मामले में सबसे जरूरी सवाल यही है कि ताजीर के तहट मौत की सजा देने का आधार क्या
05:24था
05:24अदालत में कौन से सबूत पेश किये गए और दोनों को अपना पक्ष रखने का कितना अफसर मिला
05:28इन सवालों के जवाब सामने आने पर ही यह समझा जा सकेगा कि इस मामले में न्याएक प्रक्रिया किस तरह
05:35चली और सजा किन आधारों पर दी गई

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