00:00प्रिगत की रफ्तार पर बढ़ते हुए संपूर्ण विश्व में अपना प्रभावी इस्थान बना रहा है।
00:09अनेक शक्तियां ऐसी हैं जिने ये रास नहीं आ रहा है।
00:14और वो शक्तियां देश के बाहर भी हैं और देश के अंदर भी हैं।
00:20दोनों ही शक्तियों में एक दुरभी संधी बहुत इस्पष्ट दिखाई पड़ रही है।
00:26और इस समय संपूर्ण विश्व में और योरोप में भी जो कुछ दिखाई पड़ रहा है।
00:32वो कम से कम इस विशय के बारे में और अधिक इस्पष्ट चित्र देश के हर नागरिक के मन में
00:39इस्थापित कर रहा है।
00:41और इस समय में मानी प्रधान मंत्री जीने कल विजय दश्मी के दिन एक बहुत इस्पष्ट संदेश कूरे देश को
00:50दिया है।
00:51किस समय वो शक्तियां जिनके तीन मुख्य आधार हैं वो भारत को अस्थिर करने में लगी है।
01:00नमबर वन सत्ता पे आने पर लूट। नमबर दो समाज में फूट। और नमबर तीन भारतिय संस्कृति और धर्म से
01:10घणा।
01:11मैं पुना कह देता हूँ जिनका लक्ष समाज में फूट, सत्ता में लूट और जिनके दिल में भारतीय संस्कृति और
01:19हिंदू धर्म के प्रति नफृत हैं जो इरेडिकेशन और सनातन धर्म की कॉन्फेंस करते हैं और वैश्विक इस्तर पर डिस्मैंटलिंग
01:28ग्लोबल हि
01:28मंदुत्व के अभियान को लेकर चलते हैं भारत की हर संस्था के बारे में ध्रामक प्रचार करते हैं अतह इस
01:40पर्व के अवसर पर जो भारत में आर्थिक विकास में भी महत्तपूर्ण उमिका अदा करता है गतवर्ष नवरात्र से लेकर
01:48और धीपावली शट पूजा तक 6
01:50लाग करोड़ो रुपए का कारोबार हुआ था और इस बार उससे अधिक होने की संभावना है परंतु यह बात जो
01:57मानी प्रधान मंतीजी ने याद दिलाई है हम सब को ध्यान लखना चाहिए कि यह वो शक्तियां हैं जो भारत
02:03को आगे नहीं आने देना चाहती और हर प्रक
02:19गड़ बढ़ है कभी कहेंगे एचेल गड़ बढ़ है कभी कहेंगे एसबी आई गड़ बढ़ है कभी कहेंगे सेबी गड़
02:24बढ़ है कभी कहेंगे वेक्सीन गड़ बढ़ है कभी कहेंगे एलेक्टोरल लोल में गड़ बढ़ है वास्विक्ता में जैसे कल
02:33विजय दश्मी
02:33का दिन था रावण के अनेक सर हैं दस सर हैं एक सर आप भगवान काटते थे दूसरा सर प्रकट
02:41हो जाता था अर्थात एक मांग पूरी करिए दूसरी मांग खड़ी हो जाएगी मूल कारण नाभी में है और देश
02:48के हर प्रबुद्ध विक्ति को प्रबुद्ध व्रद्ध को �
02:53प्रबुद्ध युवा को प्रबुद्ध किशोर को समझना चाहिए कि इसका मूल नाभी कहां पर है और नाभी वही है जो
03:01एक ही प्रकार के वाक्तिय और एक ही प्रकार के शब्द हर प्रकार के आंदोलन में बोलता हुआ दिखाई पड़ता
03:07है तो हमें समझना चाहिए कि ज
03:23दूसरा उधरन मैं कहना चाओंगा रामायन की कथा में जब रावन माता सीता का हरन करने आया था तो अपने
03:30वास्त्विक आसुरी वेश में नहीं आया था वो साधू का वेश धरके आया था तो ये दो बिंदु निश्यत रूप
03:36से आज ध्यान रखने योग यह हैं कि बहुत स
03:52सेड नहीं है इनका एक ही उद्देश है जो इन्होंने कहा है रिजीम चेंज यानि तक्ता पलट हिंसक संगर्ष और
04:00शडियंत के द्वारा भारत के प्रगति के मार्ग को विध्वंस करना भारतिय समाज में फूट के द्वारा तोड़ फोड़ पन
04:08करना और धर्म का संस्कृ
04:10प्रगति का विनाश करना इसलिए ये एक विचारणी है गंभीर प्रशन है तो मैं इसे सिर्फ एक पंक्ति में जो
04:21बहुत पुराना गीत था आजारी के बाद के दशक का उसकी पंक्ति आज देश के सामने मैं कहना चाहूंगा कि
04:29इस विजय दश्मी के पावन पर्व पर दे
04:32देश के सामने जो चुनोतियां हैं उन्हें बहुत गहराई से समझें और जो शक्तियां हैं उनकी वास्विक्ता को पहचाने कि
04:42कहनी है एक बाद मुझे इस देश के बर्खुरदारों से समल के रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से