आज आपकी जेब में रखा एक साधारण स्मार्टफोन उन्नीस सौ उनहत्तर के अपोलो ग्यारह मिशन के सुपरकंप्यूटर से लाखों गुना अधिक शक्तिशाली है। उस समय नासा ने जिस अपोलो गाइडेंस कंप्यूटर की मदद से इंसानों को पहली बार चांद पर उतारा था, उसकी तकनीक आज के मुकाबले बेहद सीमित थी।
अपोलो गाइडेंस कंप्यूटर में केवल चार किलोबाइट रैम और बहत्तर किलोबाइट रोम मेमोरी थी। इसका मुख्य प्रोसेसर सिर्फ शून्य दशमलव शून्य तैंतालीस मेगाहर्ट्ज की गति पर काम करता था। यह पूरा सिस्टम लगभग बत्तीस किलोग्राम वजनी था और इसे बनाने में लाखों डॉलर खर्च हुए थे।
इसकी तुलना में आज के एक सामान्य स्मार्टफोन में छह से आठ गीगाबाइट रैम और तीन गीगाहर्ट्ज तक की गति वाले प्रोसेसर होते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि आपका फोन अपोलो मिशन के कंप्यूटर से करोड़ों गुना अधिक गणनाएं प्रति सेकंड कर सकता है।
इतनी कम कंप्यूटिंग क्षमता के बावजूद नासा के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों ने इंसानी इतिहास का सबसे बड़ा कारनामा कर दिखाया था। यह कहानी साबित करती है कि बड़ी सफलताएं सिर्फ आधुनिक मशीनों से नहीं बल्कि इंसानी हौसले और सही योजना से हासिल होती हैं।
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अस्वीकरण: यह वीडियो केवल सामान्य जानकारी और मनोरंजन के लिए है। सभी तथ्य सार्वजनिक ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित हैं और चित्र केवल विषय को समझाने के लिए उपयोग किए गए हैं।