सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भोपाल की एक सत्र अदालत में चल रहे ट्विशा शर्मा की अप्राकृतिक मौत के मामले की सुनवाई पर रोक लगा दी. यह मामला भारत के चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष आया. पीठ, ट्विशा के पिता की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने कार्यवाही को मध्य प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की थी. अधिवक्ता अभिजीत सिन्हा ने ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा की ओर से पैरवी की. यह मामला फिलहाल भोपाल में एक जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष लंबित है. पीठ ने सीबीआई, मृतका के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी किया. याचिकाकर्ता ने इस आशंका के चलते स्थानांतरण की मांग की कि मध्य प्रदेश में मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाएगी. याचिकाकर्ता ने दावा किया कि आरोपियों में से एक, गिरिबाला सिंह, एक पूर्व जज हैं और राज्य में उनका काफी प्रभाव है. उन्होंने मुकदमे को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की और दलील दी कि वे दिल्ली-एनसीआर में बस गए हैं. 10 अक्टूबर तक, जब शीर्ष अदालत ने कार्यवाही पर रोक लगाई, तब तक मुकदमा आरोप तय करने पर बहस के चरण तक पहुंच चुका था. 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह के साथ शादी होने के लगभग पांच महीने बाद, मई 2026 में भोपाल स्थित अपने ससुराल में ट्विशा मृत पाई गई थी. उनके पति, जो एक वकील हैं, और सास, जो एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश हैं, इस मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं.