डबल स्लिट प्रयोग को विज्ञान के इतिहास का सबसे हैरान करने वाला प्रयोग माना जाता है। वर्ष 1801 में वैज्ञानिक थॉमस यंग ने पहली बार यह देखने के लिए प्रकाश का परीक्षण किया कि वह तरंग है या कण। जब उन्होंने प्रकाश को दो पतली झिल्लियों यानी स्लिट्स से गुजारा तो सामने की स्क्रीन पर धारियों का एक खूबसूरत पैटर्न बना जिसे इंटरफेरेंस पैटर्न कहा जाता है। इससे साबित हुआ कि प्रकाश तरंगों की तरह बहता है।
बीसवीं सदी में जब वैज्ञानिकों ने इसी प्रयोग को एक एक इलेक्ट्रॉन और फोटॉन के साथ दोहराया तो नतीजे ने पूरी दुनिया को चौंका दिया। जब तक कोई डिटेक्टर कणों को नहीं देख रहा था वे दोनों छेदों से एक साथ निकलकर तरंग जैसा व्यवहार कर रहे थे। लेकिन जैसे ही वैज्ञानिकों ने यह देखने के लिए डिटेक्टर लगाया कि कण किस छेद से गया उनका तरंग रूप तुरंत गायब हो गया।
इस प्रयोग ने सिद्ध किया कि केवल देखने मात्र से क्वांटम दुनिया की हकीकत बदल जाती है। क्वांटम भौतिकी का यह रहस्य आज भी पूरी तरह सुलझा नहीं है।
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