00:00Shastinapur Kya Guru Dronacharya
00:06Shastinapur Kya Guru Dronacharya
00:08Shastinapur Kya Guru Dronacharya
00:12Sishkar Bhekala
00:15Shastinapur Kya Ghekala
00:23भौंकता हुआ वहां आया तो एकलव्य ने बिना देखे बानों से उसका मुह बंद कर दिया। पुरुक्षेत्र के राजकुमार यह
00:31देखकर हैरान रह गए कि इस अज्यात युवक की गती अर्जुन से भी तेज थी। जब द्रोनाचार्य ने उस वीर
00:37बालक से उसका परिच
00:39पूछा तो उसने श्रधा से सिर जुका दिया। तब द्रोन ने अपने प्रियशिष अर्जुन को दिये वचन की रक्षा के
00:46लिए एकलव्य से गुरुदक्षिना मांग ली। गुरु ने बिना किसी संकोच के एकलव्य से उसके दाहिने हाथ का अंगूठा ही
00:53मांग लिया�
00:55उस महान भक्त ने अपनी तलवार उठाई और अपना अंगूठा काटकर अर्पित कर दिया। धर्ती काम उठी और देवताओं ने
01:03पुष्प वर्शा की क्योंकि ऐसा त्याब इतिहास में कभी नहीं हुआ था। अंगूठा कटने के बाद भी एकलव्य ने तरजनी
01:10और मध